poisonous water in indore

इंदौर में ज़हरीला पानी: 15 मौतें, हज़ारों बीमार, राहुल गांधी बोले – “घर-घर मातम है”

इंदौर में ज़हरीला पानी: 15 मौतें, हज़ारों बीमार, राहुल गांधी बोले – “घर-घर मातम है”

इंदौर में पानी नहीं, बल्कि ज़हर

इंदौर, मध्य प्रदेश में खराब पानी से हड़कंप मच गया है। जहरीला पानी पीने से भागीरथपुरा क्षेत्र में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 2800 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं।
गुरुवार को 338 नए मरीज मिले, जिनमें से 32 लोग अस्पताल में भर्ती हैं।

पानी से फैलने वाली बीमारी ने पूरे शहर को भयभीत कर दिया है। बहुत से घरों में सभी सदस्य बीमार हैं। अब लोग नलों से पानी पीने से भी डरने लगे हैं, क्योंकि अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है।

सरकार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हमला

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस खराब स्थिति पर राज्य सरकार और प्रशासन पर कड़ा हमला बोला है। उनका लेख एक्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर था—

“इंदौर में पानी नहीं था, ज़हर फैलता था और प्रशासन चुपचाप सो गया था।””

राहुल गांधी ने कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद महत्वपूर्ण अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई नहीं की। “सीवर का पानी सप्लाई में कैसे मिला?” उन्होंने पूछा।और “समय रहते सप्लाई क्यों नहीं रोकी गई?””

गांधी ने कहा कि गरीबों के घर मातम पसरा है, जबकि बीजेपी के नेताओं में घमंड है। उनका आरोप था कि मुख्यमंत्री और प्रशासन ने ज़रूरतमंदों को सांत्वना देने की जगह “घमंड परोसा” है।

भागीरथपुरा में क्रोध और भय

इस समय, इंदौर का भागीरथपुरा इलाका सबसे अधिक प्रभावित है। यहां के स्वास्थ्य केंद्र में मरीज सुबह से रात तक आते हैं— महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग सब बीमार हैं।

उल्टी-दस्त, बुखार और कमजोरी प्रमुख शिकायतें हैं। कई परिवारों में हर एक सदस्य बीमार हो गया है।

लोगों का कहना है कि वे अब पीने का पानी नहीं लेते। टैंकर से पानी देने की व्यवस्था नगर निगम ने की है, लेकिन लोग टैंकर का पानी पीने से भी हिचक रहे हैं। कई परिवार बोतलबंद पानी या RO की मांग कर रहे हैं।

डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को 24 घंटे तैनात करना

स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्र में 21 टीमों को भेजा है। डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम और आशा कार्यकर्ता इन टीमों में काम करते हैं।

ये टीमें घर-घर जाकर लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, बाहर का खाना न खाने और उबला पानी पीने की सलाह देती हैं।

गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने 1714 घरों का सर्वे किया था। करीब 8571 लोगों की जांच की गई, जिनमें से 338 को तत्काल उपचार दिया गया।
अभी तक अस्पताल में 272 मरीज भर्ती हुए थे, जिनमें से 71 को छुट्टी दी गई है और 201 का इलाज जारी है।

बढ़ी हुई शिकायतें और प्रशासन का जागरण

दूषित पानी की घटना के बाद, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्न उठ रहे हैं। लोगों का दावा है कि पिछले कई दिनों से पानी में गंदगी और बदबू की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी को इसकी कोई चिन्ता नहीं थी।

घटना के बाद, निगम ने जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लेना शुरू किया है। 1 जनवरी को दोपहर 2:30 बजे तक इंदौर-311 हेल्पलाइन पर 206 जल शिकायतें आईं। इनमें से सबसे अधिक शिकायतें भागीरथपुरा क्षेत्र (जोन नंबर 5) से आईं।

राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश “कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है।”

राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का केंद्र बताया। उनका दावा था कि ऐसी लापरवाही से पहले भी लोग मर चुके हैं।

उन्होंने बताया—

“कभी खांसी की सिरप से मौतें होती हैं, कभी सरकारी अस्पतालों में बच्चों को चूहे काटते हैं, और अब लोग सीवर पानी पीकर मर जाते हैं।””

गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर बार गरीबों की मौत पर चुप रहते हैं।

बीजेपी नेताओं पर जनता की नाराज़गी

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना के बीच दिए गए एक विवादित बयान से लोगों का गुस्सा और भड़क गया।
राहुल गांधी ने उनका नाम नहीं बताया, लेकिन उनके बयान पर तीखी टिप्पणी की—

“ये सवाल ‘फोकट’ नहीं हैं; ये जवाबदेही की मांग हैं।” साफ पानी जीवन का अधिकार है, नहीं कोई सौदा।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी से फैलने वाली बीमारियां पहले कभी इतनी खराब नहीं थीं। लोगों ने अब इसे सरकारी लापरवाही और प्रशासन की नींद का परिणाम समझ लिया है।

अस्पतालों में अफरा-तफरी, परिजनों का दुःख

अस्पतालों में मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या ने चिंता पैदा की है। चिकित्सक 24 घंटे काम करते हैं।
रोगग्रस्त परिवारों के सदस्य एक अस्पताल से दूसरे में भाग रहे हैं। अस्पतालों में बेड की कमी के कारण प्राथमिक उपचार के बाद कई मरीजों को घर भेज दिया जाता है।

“हमने कई बार शिकायत की थी कि पानी से बदबू आती है,” एक स्थानीय निवासी ने बताया। लेकिन कोई भी इसे नहीं देखा। अब पूरे गाँव में बीमारी है।”

बुजुर्गों और बच्चों पर अधिक प्रभाव

इस महामारी का सबसे बड़ा शिकार उम्रदराज या बीमार व्यक्ति हैं।
32 मरीजों में से अधिकांश बुजुर्ग और बच्चे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारी कहते हैं कि यह स्थिति नहीं होती अगर पानी की जांच और सप्लाई समय पर रोक दी जाती।

राहत व्यवस्था बढ़ी

अब प्रशासन लोगों को साफ पानी देने का प्रयास कर रहा है। नगर निगम ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में हर दिन टैंकर भेजे जा रहे हैं। पानी की सप्लाई लाइन की जांच की जा रही है और सैम्पल लैब भेजे गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि परिस्थितियां धीरे-धीरे नियंत्रण में हैं, लेकिन लोगों को सतर्क रहना चाहिए।

जनता में प्रश्न उठता है कि क्या जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी?

स्थानीय लोगों और विपक्ष ने मांग की है कि इस दुर्घटना की विस्तृत जांच हो और जिम्मेदार नेताओं और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।
लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी दुर्घटना की शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

“जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?” राहुल ने भी पूछा।”

‘इंदौर पानी हादसा’ सोशल मीडिया पर चर्चा में

‘इंदौर दूषित पानी’ और ‘इंदौर जल संकट’ हैशटैग्स लगातार सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।
लोग अपने क्षेत्र की तस्वीरें, वीडियो और अनुभव को फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर साझा कर रहे हैं। कई लोगों ने बताया कि नल के पानी से बदबू आ रही थी और कीड़े आ रहे थे।

लाखों लोगों ने राहुल गांधी के पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें बहुत से लोगों ने सरकार से उत्तर मांगा है।

नेताओं की उपस्थिति और प्रभाव

राहुल गांधी काफी सक्रिय हैं अपने X (Twitter), Instagram, और YouTube पर।
उनके हर पोस्ट पर लाखों लोग चर्चा करते हैं और उनके लाखों फॉलोअर्स हैं।
इसलिए उनके बयान और वीडियो तेजी से फैलते हैं।

बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय भी सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हैं, लेकिन उनके पिछले बयानों को लेकर बहुत आलोचना हुई है।

जनता की आशा: सुरक्षित जल, नहीं बहस

दूषित पानी से मौतें इंदौर जैसे सुंदर शहर में होना बहुत चौंकाने वाला है।
राजनीतिक बहसों से लोग थक चुके हैं। उन्हें उम्मीद है कि जिम्मेदार विभाग और नेता बयानबाजी से नहीं बल्कि अपने काम से जवाब देंगे।

इंदौर की जनता का नारा स्पष्ट है: “सुरक्षित पानी हमारा अधिकार है।””

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