मुंबई तट पर तेल टैंकरों का बड़ा खुलासा: नाम-झंडा बदलकर घूम रहे 3 जहाज जब्त, ईरान ने झाड़ा पल्ला
इस महीने भारत के समुद्री क्षेत्र में काफी कार्रवाई हुई। मुंबई तट पर तीन शक्की तेल टैंकर गिरफ्तार किए गए। इन जहाजों को संदेह है कि वे प्रतिबंधित तेल के व्यापार में शामिल हो सकते हैं। परीक्षण ने पाया कि इन जहाजों के IMO नंबर अमेरिका ने पहले से ही प्रतिबंध लगा चुके थे। मामला विश्वव्यापी है। ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे इन जहाजों से कोई संबंध नहीं है। वहीं भारत ने समुद्री निगरानी को और अधिक कठोर कर दिया है।
इन जहाजों को भारत की समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने मुंबई तट से करीब 100 नॉटिकल माइल्स पश्चिम में रोका। बाद में इन्हें मुंबई पोर्ट पर जांच के लिए लाया गया। शुरूआती जांच में बहुत कुछ चौंकाने वाला निकला है। अधिकारियों का कहना है कि जहाजों ने अपना नाम, झंडा और पहचान बार-बार बदले हैं। जब कोई जहाज अपनी असली पहचान छिपाना चाहता है, तो अक्सर यह तरीका अपनाया जाता है।
तीन जहाजों के बारे में गहरा शक
सूत्रों ने बताया कि अल जफजिआ, अस्फाल्ट स्टार और स्टेलर रूबी नामक जहाजों को पकड़ा गया था। अमेरिका के पहले प्रतिबंधित जहाजों के IMO नंबर इन तीनों में हैं। जांच एजेंसियों को यह बहुत चिंता का विषय बन गया है।
बताया गया है कि 2025 में अल जफजिआ नाम का जहाज ईरान से जिबूती तक ऑयल ले जाएगा। वहीं, स्टेलर रूबी पहले ईरान का झंडा था। Asfalt Star अधिकतर चीन के आसपास के समुद्री रास्तों पर सक्रिय रहा है। इन सूचनाओं ने संदेह को और बढ़ा दिया है।
6 फरवरी को अधिकारियों ने X प्लेटफॉर्म पर इस कार्रवाई की सूचना दी। बाद में वह पद हटा दिया गया। इससे मुद्दा अधिक चर्चा में आ गया।
खेल नाम और झंडा बदलकर चल रहा है
परीक्षण ने यह भी पाया कि ये जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए अपना नाम बार-बार बदलते रहे। झंडा बदलते और मालिक का नाम बदलते। यह विधि नवीन नहीं है। ऐसा अक्सर प्रतिबंधित तेल व्यापार में शामिल लोग करते हैं।
तेल बेचने वाले कम दाम पर तेल बेचते हैं जब किसी देश पर तेल निर्यात पर प्रतिबंध लगाया जाता है। खरीदार कम जोखिम लेता है, लेकिन कम कीमत मिलती है। ऐसे में जहाजों का नाम छिपा जाता है। कागज बदल जाता है। तेल अक्सर एक जहाज से दूसरे जहाज में हस्तांतरित किया जाता है ताकि असली स्रोत छिपा जा सके।
Experts believe that IMO number is a permanent way to identify a ship। ध्वनि और नाम बदल सकते हैं, लेकिन IMO संख्या नहीं बदलता। यही कारण है कि जांच एजेंसियां IMO संख्या को सबसे महत्वपूर्ण मानती हैं।
अमेरिका ने पहले प्रतिबंध लगाए थे
अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल ने पिछले साल ग्लोबल पीस, चिल 1 और ग्लोरी स्टार 1 नामक जहाजों पर प्रतिबंध लगाया था। परीक्षण में पता चला कि इन प्रतिबंधित जहाजों के IMO नंबर मुंबई के पास पाए गए थे।
ये जहाज शायद प्रतिबंधों को तोड़कर तेल व्यापार में लगे हों। अमेरिका ने कुछ देशों पर तेल निर्यात पर लंबे समय से सख्ती की है। यदि कोई कंपनी या जहाज इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे भारी जुर्माना और कार्रवाई का सामना करना पड़ा सकता है।
ईरान का स्पष्ट विरोध
ईरान की राष्ट्रीय ईरानियन ऑयल कंपनी ने इन जहाजों से कोई संबंध होने से इनकार कर दिया है। कम्पनी कहती है कि उनका इन टैंकरों से कोई संबंध नहीं है। ईरान पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है।
तेल अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं तेल की सप्लाई और कीमतों से प्रभावित होती हैं। यही कारण है कि हर देश अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता है।
Indian Coast Guard ने निगरानी बढ़ा दी
इस घटना के बाद, इंडियन कोस्ट गार्ड ने समुद्र की सुरक्षा को अधिक कठोर कर दिया है। भारत के समुद्री क्षेत्र में अब 24 घंटे निगरानी की जा रही है, सूत्रों ने बताया। दस से बारह विमान और लगभग पच्चीस जहाज तैनात किए गए हैं।
अधिकारी समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। किसी भी खतरनाक जहाज को तत्काल रोका जा सकता है। भारत अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा पर गंभीरता से विचार करता है। यह भी उसी दिशा में हुआ है।
भारत तेल उत्पादक देश है। देश को ऊर्जा की बहुत जरूरत है। इसलिए समुद्र में आने वाले हर जहाज की जांच की जानी चाहिए। सुरक्षा एजेंसियां अब अधिक सावधान हैं।
प्रतिबंधित तेल व्यापार की प्रक्रिया
जब किसी देश पर तेल बेचने का प्रतिबंध लगता है, तो वे अक्सर नए उपाय खोजते हैं। तेल कम मूल्य पर बेचा जाता है ताकि खरीदार जोखिम उठाने को तैयार हों। बिचौलिये आते हैं। नकली कागज बनाया जाता है। जहाजों को नए नाम देते हैं।
जहाज कभी-कभी समुद्र के बीच रुक जाते हैं। वहाँ तेल एक जहाज से दूसरे में भरा जाता है। इससे मूल स्रोत छिपा हुआ है। कानून बताता है कि तेल किसी और देश से आया है। खेल पूरी तरह से चुपचाप चलता है।
लेकिन आज तकनीक विकसित हो गई है। जहाजों की हर हरकत पर सैटेलाइट से नजर रखी जा सकती है। जहाज का स्थान AIS सिस्टम से पता चलता है। एजेंसियां सतर्क हो जाती हैं अगर कोई जहाज बार-बार अपना सिग्नल बंद करता है या रूट बदलता है।
रूस की घोषणा और ऊर्जा राजनीति
रूस ने भी इस बीच बयान दिया है। रूस ने कहा कि भारत पर उनसे तेल न खरीदने का दबाव डाला जा रहा है। रूस ने दावा किया कि अमेरिका ऊर्जा सप्लाई पर कब्जा करना चाहता है ताकि दूसरे देश उससे महंगी गैस खरीद सकें।
राजनीति ऊर्जा बाजार में नई नहीं है। आम लोगों की जिंदगी तेल और गैस की कीमतों से सीधे प्रभावित होती है। हर चीज महंगी हो जाती है क्योंकि पेट्रोल-डीजल महंगा है। इसलिए देश अपने हितों को देखकर निर्णय लेते हैं।
भारत ने अपने राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वह सस्ता और सुरक्षित तेल जहां से मिलेगा वहीं से खरीदेगा। लेकिन भारत भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करता है।
भविष्य में क्या होगा?
मुंबई में पकड़े गए तीनों जहाजों की जांच अभी भी जारी है। दस्तावेजों को अधिकारी जांच कर रहे हैं। मालिक कंपनियों का विवरण संकलित किया जा रहा है। साथ ही, जहाजों के अंतिम मार्ग का अध्ययन किया जा रहा है।
अगर पता चलता है कि जहाजों ने प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। भारत इस मामले में सतर्कता से कार्य कर रहा है। क्योंकि मुद्दा कई देशों से जुड़ा है।
यह घटना एक बार फिर सिद्ध करती है कि समुद्र में व्यापार के अलावा राजनीति और रणनीति भी होती है। हर जहाज सिर्फ माल नहीं ढोता, बल्कि कई प्रश्न भी उठाता है।
भारत की एजेंसियां अब अधिक सावधान हैं। समुद्री सुरक्षा बढ़ी है। ऐसे मामलों पर आने वाले समय में अधिक सख्ती देखने को मिल सकती है।
इन तीन तेल टैंकरों ने मुंबई तट पर पकड़े गए थे और उनके खेल में बहुत कुछ था। नामों को बदल सकते हैं। झंडे परिवर्तित किए जा सकते हैं। लेकिन सच्चाई बहुत देर नहीं रह सकती। परीक्षा जारी है। अब इस मामले पर पूरी दुनिया की दृष्टि है।