Dwarka accident

द्वारका हादसा: ‘मैं नहीं चाहती थी कि वो इस देश में रहे…’ बेटे की मौत पर मां की चीखों ने सिस्टम को कटघरे में खड़ा किया

द्वारका, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में हुए एक सड़क हादसे ने सभी को हैरान कर दिया है। 23 साल के साहिल धनेश्रा अब नहीं हैं। इन्ना माकन, उनकी मां, अकेली रह गई है। वह एकमात्र माँ है। 23 साल तक वे अपने बेटे को अकेले पालते रहे। यह वही मां है जो आज कैमरे के सामने रो रही है और पूछ रही है—क्या किसी की जान इतनी महंगी है?

यह दुर्घटना सिर्फ एक परिवार को दुखी नहीं करती। यह सिस्टम की समस्या है। यह कानून के खिलाफ है। और यह हमारी सड़कों की सुरक्षा का मुद्दा है।

घटना की रात: एक फोन और सब समाप्त

3 फरवरी की रात को हुआ था। समय लगभग एक बजकर 19 मिनट था। पुलिस ने इन्ना माकन को फोन किया। पुलिस ने कहा कि एक आर-15 स्पोर्ट्स बाइक का दुर्घटना हुआ है। युवा मौके पर मर गया है।

मां की आत्मा बैठ गई। वह भागकर घटनास्थल पहुंचीं। वहां मैंने जो देखा, किसी भी मां के लिए स्वीकार करना मुश्किल था।

जब बेटा सड़क पर पड़ा था, तो मां चीखती रही।

Sahil सड़क पर पड़ा था। उसकी बाइक टुकड़े हो गए थे। जैकेट गिर गई। शरीर बिगड़ गया था। “मैं दस मिनट तक चिल्लाती रही,” माँ बताती है। एंबुलेंस के सामने खड़ी हुई थी। लेकिन मेरा बच्चा अभी भी सड़क पर पड़ा था।”

उनकी आवाज थरथराती है। आंसू रुकते नहीं। वह बार-बार कहती है कि समय पर मदद मिलने से कुछ बदल सकता था।

मां का आरोप: प्राइवेट अस्पताल में नहीं ले जाया गया

इन्ना माकन का आरोप है कि उन्हें अस्पताल में भी बेटे को निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। “मैं चार घंटे तक अस्पताल में चिल्लाती रही,” वह बताती है। मेहनत करती रही। मैं अंतिम प्रयास करना चाहता था। लेकिन कोई भी नहीं सुन सका।”

पोस्टमार्टम के बाद उन्हें अपने बेटे की लाश मिली। यह इंतजार एक मां पर बहुत बोझ था।

तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने एक व्यक्ति को मार डाला

पुलिस ने बताया कि द्वारका सेक्टर-11 में हादसा हुआ था। एक स्कॉर्पियो एसयूवी तेजी से एक टैक्सी से टकराई। फिर उसने बाइक चलाते हुए साहिल को पीटा।

टक्कर इतनी तीव्र थी कि साहिल उसी समय मर गया। टैक्सी चालक अजीत सिंह ने चोट लगी।

लोगों का कहना है कि गाड़ी बहुत तेज चल रही थी। कुछ लोगों का कहना है कि कार में बैठे व्यक्ति रील बना रहे थे।

19 वर्षीय युवा बिना लाइसेंस चला रहा था

परीक्षण से पता चला कि स्कॉर्पियो चला रहा व्यक्ति 19 वर्ष का था। उसका ड्राइविंग लाइसेंस वैध नहीं था। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

लेकिन उसे बाद में बोर्ड परीक्षा देने के लिए अंतरिम जमानत मिली।

यहीं से सवाल उठने लगे। “मेरे बेटे की जान चली गई,” माँ पूछती है। और आरोपी घर पर परीक्षा देने गया?”

पूर्व में 13 चालान

इन्ना माकन ने कहा कि हादसा हुआ एसयूवी पर पहले से 13 चालान थे। ये चालान ओवरस्पीडिंग से उत्पन्न हुए थे।

क्या यह दुर्घटना रोकी जा सकती थी अगर सख्ती पहले से होती? अब सोशल मीडिया पर भी यह प्रश्न उठता है।

“मैं नहीं चाहती थी कि वह इस देश में रहे..।”

मां का एक वीडियो फैल गया है। “मैं हमेशा चाहती थी कि मेरा बेटा इस देश में नहीं रहे,” वह रोते हुए कहती है। मैंने यहां की स्थिति देखकर उसे बाहर जाने को कहा।”

वह बताती है कि साहिल ने मैनचेस्टर जाने का सपना देखा था। वह बहुत मेहनत करता था। हैरान था। वह स्वयं कुछ करना चाहता था।

अब उसका सपना पूरा नहीं हुआ।

एक माँ की कहानी

इन्ना माकन ने अकेले साहिल को पाला। उनमें मां और पिता दोनों का किरदार था। वह बताती है कि उनका बेटा बहुत बुद्धिमान था। वह परिवार के लिए मदद करना चाहता था।

अब घर शांत है। दीवारें नहीं बोली। कमरे लगभग खाली हैं।

एक मां का जीवन अपने बच्चे से शुरू होता है। सब खत्म हो जाता है जब बच्चा चला जाता है।

सोशल मीडिया में व्याप्त

इन्ना माकन का वीडियो बहुत जल्दी वायरल हो गया। उसे लाखों लोग देख चुके हैं। लोग टिप्पणी कर रहे हैं। कुछ लोग सहानुभूति जता रहे हैं। सिस्टम पर कुछ लोग प्रश्न उठाते हैं।

लोग पूछ रहे हैं कि बिना लाइसेंस के कोई कार कैसे चला सकता है? 13 चालान होने के बाद भी कठोरता क्यों नहीं बढ़ी?

सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे

दिल्ली में तेज रफ्तार एक बड़ी समस्या है। गाड़ी रील बनाने के लिए बहुत तेज है। वे खतरा उठाते हैं। यह खतरा कभी-कभी जानलेवा हो जाता है।

यह दुर्घटना हमें विचार करने पर मजबूर करती है। कानून के प्रति भय क्या खत्म हो गया है? क्या चालान भरना पर्याप्त है?

मां का एकमात्र आग्रह: न्याय

“मैं एक हेल्पलेस मदर हूं,” इन्ना माकन बार-बार कहती है। न्याय चाहिए।”

उनकी आवश्यकता सीधी है। वह चाहती है कि दोषी सख्त सजा पाए। वह चाहती हैं कि कोई और मां ऐसा न करे।

वह लोगों से अपील कर रही हैं कि वे अपनी आवाज दूसरों को सुनाएं। वह सिस्टम को सुधारना चाहती है।

न्याय और इंसाफ

आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह कदम सही था। लेकिन अंतरिम जमानत ने विवाद पैदा कर दिया है।

कानून सबका समान होना चाहिए। सख्त कार्रवाई आवश्यक है अगर कोई बिना लाइसेंस गाड़ी चलाता है और तेज रफ्तार से हादसा करता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए। चालान काटना पर्याप्त नहीं है। नियमित रूप से गलत काम करने वालों पर कड़ी नजर होनी चाहिए।

एक बेकार सपना

Sahil का बहुत बड़ा सपना था। उसने विदेश जाना चाहा। वह खुद कुछ करना चाहता था। वह बहुत मेहनत करता था, मां कहती हैं। वह पराजय को कभी नहीं मानता था।

उसका कमरा अब भी वैसा ही है। किताबें हैं। हेलमेट लगा हुआ है। साहिल नहीं है।

एक मां के लिए यह खाली जगह हमेशा रहती रहेगी।

समाज के लिए उपदेश

यह दुर्घटना केवल एक खबर नहीं है। यह एक संकेत है। हम सड़क पर सावधान रहेंगे। हमें कानून का पालन करना चाहिए।

युवा साथी जानना चाहिए कि रील बनाना जीवन से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। एक छोटी सी गलती बहुत सी जिंदगियां बर्बाद कर सकती है।

माता-पिता भी बच्चों को बताना चाहिए। गाड़ी चलाना एक कर्तव्य है। इसमें खेल नहीं है।

सिस्टम जागेगा

13 चालान किसी गाड़ी पर होने का संकेत है कि कुछ गलत है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। लाइसेंस के बिना गाड़ी चलाने पर कड़ी सजा दी जाएगी।

लोग नियम मानेंगे जब सिस्टम मजबूत होगा। नियमों का पालन करने से हादसे कम होंगे।

अंत में

द्वारका में हुआ यह दुर्घटना एक मां की चिंता का विषय बन गया है। इन्ना माकन की आवाज अब उनके घर तक नहीं सीमित है। पूरे देश में उसकी आवाज उठ रही है।

“क्या मेरे बेटे की जान की कोई कीमत नहीं थी?” वह पूछ रही हैं।”

यह सवाल सबका है।

Sahil अब नहीं आएगा। लेकिन अगर इस हादसे से सबक लिया जाए, कानून मजबूत किया जाए और लोग जिम्मेदार बनें, तो शायद एक और मां की गोद सूनी होने से बच जाएगी।

न्याय केवल सजा नहीं होती। न्याय विश्वास है। भरोसा कि कानून हर व्यक्ति के लिए समान है। भरोसा कि कोई भी गलती से बच नहीं सकता

अब पता लगाना होगा कि यह भरोसा बरकरार रहता है या नहीं।

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