RBL बैंक पर संकट की आहट या अफवाह? RBI की ‘सब चंगा सी’ सफाई क्या कहती है
RBL बैंक पिछले कुछ महीनों में बार-बार चर्चा में आया है। निवेशकों को हर खबर ने विचलित कर दिया है, चाहे वह शेयर भाव में गिरावट हो, सीईओ की छुट्टी हो या विदेशी निवेश की चर्चा हो। लेकिन वास्तविक प्रश्न यही है—RBI का “सब चंगा सी” वाक्य क्या कुछ छिपा रहा है? क्या RBL में सब सच है?
आरबीएल बैंक को क्या हुआ?
भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से RBL बैंक ने हाल ही में एक विशिष्ट अनुरोध किया था। बैंक चाहता था कि विदेशी निवेश पर 24 प्रतिशत की अस्थायी सीमा निर्धारित की जाए। लेकिन सरकार और आरबीआई ने इसकी अनुमति नहीं दी।
इसलिए शेयर बाजार ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। उस दिन RBL बैंक का शेयर 1.50 प्रतिशत टूटकर ₹310.90 तक गिर गया, लेकिन दिन के अंत में ₹315.65 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी बैंक इंडेक्स, जिसमें 13 बड़े बैंक शामिल हैं, ग्रीन जोन में गिर गया।
विदेशी निवेश का मुद्दा क्या है?
बैंक ने यह सीमा लगाने का उद्देश्य यह था कि एमिरेट्स एनबीडी (Emirates NBD) के साथ हो रहे सौदे को नियंत्रित रखा जाए। RBL का कहना है कि उसने सिर्फ एहतियात से अनुमति मांगी थी, नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया था।
एमिरेट्स एनबीडी, सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करते हुए, मौजूदा शेयरहोल्डिंग पैटर्न में 51% तक की हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। यानी सौदा अभी चल रहा है।
शेयरों का अतीत
RBL बैंक का शेयर जनवरी 2025 में महज ₹146 पर था। दस महीने बाद नवंबर 2025 में, यही शेयर ₹331.80 तक पहुंच गया। यानी एक वर्ष में निवेशकों का धन लगभग दोगुना हो गया।
18 विश्लेषकों में से 11 ने अब शेयर खरीदने की सलाह दी है। 4 “होल्ड” और 3 “सेल” हैं। टारगेट प्राइस ₹220 से ₹430 है। यानी के भविष्य को लेकर मतभेद हैं।
तीन वर्ष पहले की घटना
यह कहानी यहीं नहीं खत्म होती। 2021 के अंत में RBL बैंक को पहली बार संकट की सूचना मिली। बैंक के सीईओ और एमडी विश्ववीर आहूजा ने अचानक छुट्टी ले ली। फिर क्या हुआ—समाचार बाजार गर्म हो गया।
आरबीआई ने तुरंत बैंक के बोर्ड में अपने कर्मचारी योगेश दयाल को एडिशनल डायरेक्टर नियुक्त किया। इससे बैंक की दुर्दशा का संदेह बढ़ा। अगले दिन RBL के शेयर लगभग 20% गिर गए।
आरबीआई का बयान: “सब चंगा सी”
RBI ने शेयरों में गिरावट और अफवाहों के बीच कहा, “बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत है।” किसी को चिंता नहीं है।”
यह बयान राहत देने वाला था, लेकिन कुछ निवेशकों ने इसे सिर्फ औपचारिक घोषणा ही समझा। उनका कहना है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ऐसे ही सतर्क बयान देता है जब भी किसी बैंक में कोई समस्या सामने आती है, ताकि बाजार को आश्चर्य न हो।
RBL बैंक ने किस तरह की सुविधा दी?
बैंक के नवनियुक्त अंतरिम सीईओ राजीव आहूजा ने मीडिया को सफाई दी। उनका कहना था—
बैंक में पर्याप्त धन है। हमारी पूंजी स्थिर है। अगले आठ से बारह महीने तक हमें कोई खर्च नहीं होगा।”
साथ ही, उन्होंने बताया कि बैंक का लिक्विड कवरेज रेश्यो (LCR) 155 है, जबकि नियमानुसार 100 होना चाहिए। कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो 16.3% है, जबकि एनपीए 2.14% पर स्थिर है।
फिर शेयरों में गिरावट क्यों आई?
शेयर बाजार केवल आंकड़ों से नहीं चलता, बल्कि भावनाओं और अनुमानों से भी चलता है। जब निवेशकों ने सुना कि आरबीआई ने निगरानी अधिकारियों को नियुक्त किया है, तो उन्हें यस बैंक, लक्ष्मी विलास बैंक और PMC बैंक जैसे पुराने बैंक संकट याद आ गए।
बैंकों में भी शुरुआत में सब कुछ “ठीक” बताया गया था, लेकिन बाद में हालात बदतर हो गए। लोग भी RBL बैंक को लेकर डर गए।
RBL बैंक में कमजोरी
बैंक की गति पिछले कुछ वर्षों में धीमी हुई है, जैसा कि आंकड़े बताते हैं।
2018-19 में नेट प्रॉफिट ₹867 करोड़ था, लेकिन 2020-2021 में ₹508 करोड़ रह गया।
रिटर्न ऑन ऐसेट (ROA) 1.27% से 0.54% तक गिर गया।
तीन वर्षों में, लोन ग्रोथ केवल ₹54,308 करोड़ से ₹58,623 करोड़ तक बढ़ी।
यानी बैंक के लोन देने और कमाई दोनों सुस्त पड़ी हैं।
स्टॉक की निरंतर गिरावट
RBL बैंक में जुलाई 2019 में एक शेयर ₹700 था। यह दिसंबर 2021 तक 141 रुपये पर था। तीन वर्ष में यह बहुत बड़ा गिरावट है। निवेशकों को यह बहुत बुरा लगा।
ब्रोकरेज फर्मों ने तब चेतावनी दी कि RBL बैंक को NSE के बैंक निफ्टी इंडेक्स से बाहर कर बैंक ऑफ बड़ौदा की जगह ले सकता है। समाचार भी निवेशकों के लिए बुरा था।
बिग बुल की एंट्री पर बहस
बाजार में चिंता बढ़ गई जब “बिग बुल” राकेश झुनझुनवाला और राधाकिशन दमानी ने RBL बैंक में निवेश करने की घोषणा की। झुनझुनवाला 10% हिस्सेदारी ले सकते हैं, कहा गया है।
लेकिन यह सूचना सत्य नहीं थी। RBI की निगरानी की खबरें भारी पड़ीं, लेकिन शेयरों पर कोई असर नहीं हुआ।
निवेशकों को क्या भय है?
बैंकिंग क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियों का सामना किया—
- PNB स्कैम (11,356,000 करोड़ रुपये)
- यस बैंक का विलय
- PMC Bank घोटाला
- लक्ष्मी विलास बैंक की गिरफ्तारी
- DHFL और IL&FS जैसे एनबीएफसी
इन सब घटनाओं के बाद लोगों ने बैंकों पर अपना भरोसा खो दिया।
यही कारण है कि निवेशक सबसे पहले सतर्क हो जाते हैं जब RBI की “निगरानी” शब्द किसी भी बैंक में सामने आता है।
राजीव आहूजा के सामने वर्तमान चुनौती
RBL बैंक के अंतरिम एमडी और सीईओ राजीव आहूजा अब पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने वादा किया है कि बैंक वापस अपना पहले का विश्वास पाएगा।
उनका दावा है—
हमारे पास बलिष्ठ बैलेंस शीट है। हम खुदरा कारोबार और डिजिटल बैंकिंग पर ध्यान दे रहे हैं। बैंक आने वाले महीनों में अधिक स्थिर होगा।”
RBL बैंक की सोशल मीडिया उपस्थिति
RBL Bank सोशल मीडिया पर बहुत सक्रिय है। ग्राहकों को ऑफर, सेवा अपडेट और वित्तीय शिक्षा से जुड़ी जानकारी उसके फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पेज पर मिलती है।
बैंक की डिजिटल ब्रांडिंग नीति स्पष्ट रूप से युवा ग्राहकों को लक्षित करती है।
बैंक की दुर्दशा की खबरें भी सोशल मीडिया पर ट्रोल की गईं। “#RBLBank” चर्चा में आने लगा है। जबकि बैंक ने कहा कि सब कुछ सामान्य है, कई ग्राहक ने पैसे निकालने की चिंता व्यक्त की।
RBL बैंक की कुल संपत्ति
RBL बैंक मजबूत नेट वर्थ है।
कुल परिसंपत्तियाँ (कुल संपत्ति): लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये
न्यूनतम आय: करीब 15,000 करोड़ रुपये
कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो: १६% से अधिक, जो बहुत अच्छा समझा जाता है।
यह दिखाता है कि बैंक भविष्य की योजनाओं को बनाने और अपनी दायित्वों को पूरा करने में सक्षम है।
बैंकिंग क्षेत्र की जानकारी
RBL बैंक का मामला बताता है कि बैंकिंग क्षेत्र में भरोसा बहुत महत्वपूर्ण है।
बाजार को एक अफवाह, नियुक्ति या छुट्टी की खबर बदल सकती है।
इसलिए बैंकों और नियामक निकायों को पारदर्शिता बरकरार रखनी चाहिए।
बैंक को निवेशकों और आम जनता का भरोसा लौटना आसान होगा अगर वह दिखा सके कि वह स्थिर है।
निकास: अब क्या होगा?
RBL बैंक ने कई गिरावट झेली हैं। कभी तेज, कभी धीमी
आज बैंक अस्तित्व में है, लेकिन निवेशकों का ध्यान हर जगह है।
RBI का कहना कि “सब चंगा सी” कुछ राहत देता है, लेकिन वास्तविकता यह है—
बैंक को अब साबित करना होगा कि लोगों का भरोसा सिर्फ वाक्यों से नहीं बल्कि कार्यों से प्राप्त होता है।