Indias strict message

भारत का सख्त संदेश: आतंक फैलाओगे तो जवाब मिलेगा

भारत का सख्त संदेश: आतंक फैलाओगे तो जवाब मिलेगा

जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा को किसी से नहीं डरेगा।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और आतंकवाद पर हाल के दिनों में दो महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। एक बयान भारत में, दूसरा अमेरिका में। दोनों स्थानों पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी बाहरी दबाव को नहीं मानेगा। भारत आतंकवाद पर प्रतिक्रिया देगा।

जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उनका दावा था कि भारत आवश्यक कार्रवाई करेगा, झुकेगा नहीं।

आतंकवाद और अच्छे संबंध नहीं मिल सकते

एस. जयशंकर ने आईआईटी मद्रास में एक कार्यक्रम में कहा कि भारत को सुरक्षित रहना होगा तो उसे अपने पड़ोसियों से सावधान रहना होगा। भारत के पास अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा हक होता है, जब कोई पड़ोसी देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता है।‘’

जयशंकर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच पानी बंटवारे का समझौता जैसे संबंध तब तक ही चल सकते हैं, जब तक आतंकवाद जारी रहता है। तुम हमसे उम्मीद नहीं कर सकते कि हम पानी साझा करेंगे और आप आतंकवाद फैलाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ये दोनों बातें साथ नहीं चल सकतीं।

पहलगाम आक्रमण: भारत ने कठोर प्रतिक्रिया दी

विदेश मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में पहलगाम हमले को भारत-पाकिस्तान के संबंधों में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने अप्रैल 2025 में पर्यटकों पर हमला करके कई लोगों को मार डाला। इस हमले ने देश को हिला दिया।

जयशंकर ने कहा कि यह हमला भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर भी था। आतंकियों ने कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र को नष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यह एक सोचा-समझा आर्थिक संघर्ष था।

अमेरिका में भी स्पष्ट संदेश

जयशंकर ने वॉशिंगटन, डीसी में मीडिया से बातचीत करते हुए भारत की स्थिति को भी स्पष्ट किया। उनका कहना था कि भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है, और वह हमेशा ऐसा करेगा।

उनका कहना था कि आतंकवाद फैलाने वाले और पीड़ित समान नहीं हो सकते। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनानी चाहिए।’’

ट्रेड और कूटनीति अलग-अलग हैं

अमेरिकी मीडिया ने कहा कि अमेरिका का दबाव और व्यापारिक भय भारत-पाकिस्तान सीजफायर का कारण था। लेकिन जयशंकर ने इसे बिल्कुल खारिज कर दिया। उनका कहना था कि व्यापार और कूटनीति अलग-अलग हैं।

ट्रेड के कर्मचारी अपना काम कर रहे हैं। वे आंकड़े, सौदे और उत्पादों पर फोकस कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि यह एक अलग मामला है। उन्हें यह भी कहा कि भारत ने सीजफायर स्वतंत्र रूप से पाकिस्तान के साथ सीधे बातचीत करके नहीं बल्कि किसी बाहरी देश के दबाव से किया था।

क्रियाशील सिंदूर: आतंकवादी प्रतिक्रिया

22 अप्रैल के हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पीओके पर हवाई हमले किए। 6 से 7 मई की आधी रात को इंडियन एयरफोर्स ने 9 आतंकी ठिकानों को 25 मिनट के ऑपरेशन में तबाह कर दिया। इस मिशन को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया था।

दोनों देशों ने चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमले किए। लेकिन आखिरकार 10 मई को सीजफायर लागू हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा की और कहा कि युद्ध समाप्त हो गया है। भारत ने हालांकि बार-बार कहा कि सीजफायर भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत का परिणाम था।

ट्रम्प का दावा और भारत की प्रतिक्रिया

डोनाल्ड ट्रम्प ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान जंग को रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका दावा है कि उन्होंने दोनों देशों को धमकी दी थी कि अमेरिका व्यापार बंद कर देगा अगर जंग जारी रहती है।

ट्रम्प के इस दावे को भारत ने नकार दिया है। जयशंकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत स्वतंत्र रूप से निर्णय लेता है। हम किसी की सलाह नहीं मानते। उन्होंने कहा कि वे अपने हित की रक्षा के लिए सब कुछ करेंगे।

परमाणु धमकी से भयभीत भारत

जयशंकर ने कहा कि भारत परमाणु हथियारों की धमकी से अब डर नहीं है। पाकिस्तान ने परमाणु शक्ति के नाम पर भय दिखाया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान हमला करेगा, तो भारत सीधे जवाब देगा।

उनका कहना था कि भारत अब आतंकियों और उनके मालिकों को निशाना बनाएगा जो भारत के खिलाफ साजिश करते हैं। जयशंकर ने कहा, “न आतंकियों को छोड़ा जाएगा, न उन्हें पालने वालों को बख्शा जाएगा।”

भारत का स्पष्ट दृष्टिकोण

अमेरिका में एक इंटरव्यू में, जयशंकर ने कहा कि भारत का आतंकवाद के खिलाफ रुख स्पष्ट है। अब किसी भी प्रॉक्सी हमला बर्दाश्त नहीं होगा। अब आतंकियों को प्रॉक्सी नहीं बल्कि दुश्मन माना जाएगा।‘’

भारत की सेना, तकनीक और इच्छाशक्ति सब मजबूत हैं, उन्होंने कहा। हमारे पास सब कुछ आवश्यक है। “हम सिर्फ फैसला करते हैं,” जयशंकर ने मुस्कुराते हुए कहा।

भयमुक्त होना एक अच्छे पड़ोसी बनने के लिए आवश्यक है

जयशंकर ने हर बार कहा कि अच्छे संबंध आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते। हमने आतंकवाद नहीं साझा किया, लेकिन पानी साझा किया। अच्छे पड़ोसी का भरोसा यह संबंध बनाए रखता है। उन्होंने कहा कि रिश्ते कमजोर होंगे जब आतंकवाद जारी रहेगा।

उनका मानना था कि भारत अपने पड़ोसियों से शांति चाहता है, लेकिन शांति मजबूरी से नहीं बल्कि दृढ़ता से होनी चाहिए।

भारत की आत्मविश्वासपूर्ण छवि

भारत के आत्मविश्वास को जयशंकर का यह बयान दिखाता है। आज भारत दुनिया के सामने डंके की चोट पर कहता है कि वह अपनी सुरक्षा खुद कर सकता है। भारत अब किसी दूसरे देश के दबाव में नहीं आने वाला।

भारत ने पहलगाम हमला को एक चेतावनी माना और इसे एक कठोर संदेश में बदल दिया। भारत हर स्तर पर तैयार है, चाहे वह आतंकवादी हमला हो या कूटनीतिक दबाव हो।

जयशंकर की सोशल मीडिया लोकप्रियता

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपनी स्पष्ट, सटीक और कूटनीतिक शैली के लिए मशहूर हैं। उनके प्रशंसकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, खासकर सोशल मीडिया पर।

X (पहले ट्विटर), यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर उनके बयान अक्सर चर्चा में रहते हैं। उन्हें लोग “भारत का इस्पातीय दूत” कहते हैं। उनके उत्तर सरल और स्पष्ट हैं, जो युवाओं को बहुत पसंद आते हैं।

नेट वर्थ और जीवनदर्शन

जयशंकर का लंबा करियर बहुत सम्मानित रहा है। उनका चार दशक से अधिक का अनुभव विदेश सेवा में है। वे अमेरिका, चीन और सिंगापुर में भारत के राजदूत रहे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका नेट वर्थ लगभग पंद्रह से बीस करोड़ रुपए है। इसके बावजूद, वह अपने जीवन को सादा और नियंत्रित रखते हैं।

वह एक सजग, बुद्धिमान और बहुत संतुलित नेता की छवि है। वे अपने शब्दों और व्यवहार दोनों से दिखाते हैं कि भारत की विदेश नीति अब आत्मरक्षा पर निर्भर है।

उत्कर्ष

भारत अब आतंकवाद से सहमत नहीं होगा। जयशंकर ने पाकिस्तान को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को संदेश दिया है।

भारत ने कहा, “हम शांति चाहते हैं, लेकिन शर्तों पर नहीं; सुरक्षा और सम्मान के साथ।अब आतंकवादी हमलों पर प्रतिक्रिया दी जाएगी और भारत अपने नागरिकों को हर समय सुरक्षित रखेगा।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *