Ghaziabad triple suicide

गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड ने झकझोरा देश, सोनू सूद बोले– बच्चों को एल्गोरिदम नहीं, देखभाल चाहिए

पूरे देश को गाजियाबाद से आई एक खबर ने हिला कर रख दिया है। तीन नाबालिग बहनों की मृत्यु ने हर माता-पिता, शिक्षक और जिम्मेदार व्यक्ति को विचार करने पर मजबूर कर दिया है। यह सिर्फ एक परिवार के दुःख का मामला नहीं है। यह आज के बच्चों को मोबाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग से उत्पन्न दबाव की कहानी है। अभिनेता सोनू सूद ने इस दुखद घटना पर बयान दिया है। अब उनका दुःख भरा संदेश बहुत बहस का कारण बन रहा है।

गाजियाबाद में हुई घटना ने सबको हैरान कर दिया

यह घटना टीला मोड़ थाना क्षेत्र में हुई है। यहां एक ऊंची इमारत से तीन एकजुट बहनों ने छलांग लगाई। तीनों बहुत छोटे थे। उसकी उम्र 16 थी, दूसरी 14 और सबसे छोटी 12 साल की थी। रात के करीब दो बजे लोग जोर की आवाज सुनकर निकल पड़े। बाद में पता चला कि तीन बच्चियां नीचे गिरी थीं। पुलिस मौके पर आई। अध्ययन शुरू हुआ। लेकिन देर हो चुकी थी।

पहली जांच में क्या पाया गया?

पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक आश्चर्यजनक बात सामने आई। बताया गया कि तीनों बहनें कोरियन गेम ऑनलाइन खेलती थीं। गेम टास्क पर आधारित है। इसमें खेलने वालों को अलग-अलग काम मिलते हैं। यह गेम दिमाग पर धीरे-धीरे प्रभाव डालने लगता है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बच्चियां इस गेम के मोह में फंस गईं। जब उनके माता-पिता ने मोबाइलों का उपयोग बंद कर दिया, तो वे बहुत परेशान हो गए।

मोबाइल लत और बच्चों के बदलते जीवन

मृत बच्चियों के पिता ने बताया कि वे लॉकडाउन के दौरान ही मोबाइल फोन का उपयोग करने लगे थे। शुरू में सब कुछ सामान्य लगता था। पढ़ने का साधन इंटरनेट था। समय भी अधिक था। लेकिन धीरे-धीरे मोबाइल उनके जीवन में शामिल हो गए। तीनों बहनें एक साथ हर कार्य करने लगीं। साथ पढ़ना, खाना और रहना। जब मोबाइल उनके हाथ से बाहर हो गया, तो बेचैनी बढ़ी। यह लक्षण आज डिजिटल एडिक्शन कहलाते हैं।

कोरियन काम पर आधारित गेम का खतरनाक सच

बताया जाता है कि बच्चों ने कोरियन गेम खेलते समय पहले अकेले रहने को कहा था। फिर किसी से बात नहीं करने की जिम्मेदारी दी जाती है। अगला काम है घरवालों से दूर रहना। उन्हें रोना और खाना छोड़ देना बताया जाता है अगर मोबाइल छीन लिया जाए। और अंत में, सबसे घातक काम यानी जान देना। यह सुनकर रोंगटे खड़े हो गए।

सोनू सूद में फटा हुआ कलेजा

सोनू सूद ने सोशल मीडिया पर इस दुखद घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गरीबी या हिंसा की वजह से कोई मौत नहीं हुई। इसका कारण डिजिटल लत और ऑनलाइन गेमिंग का दबाव है। उन्होंने लिखा कि बच्चों को सही राह दिखानी चाहिए। कुछ एल्गोरिदम नहीं है। उनके शब्दों में दुःख और क्रोध था।

अब कार्रवाई करने का समय है।

सोनू सूद ने कहा कि यह समय नहीं है किसी को दोष देने के लिए। बच्चों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग से दूर करना चाहिए। बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से शिक्षा से दूर रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी खबरें फिर से प्रसारित होंगी अगर कोई उपाय नहीं किया गया।

पहले भी बोल चुके हैं

यह पहली बार नहीं है कि सोनू सूद ने इसे उठाया है। उन्होंने दिसंबर 2025 में भी सरकार से अपील की थी। उन्होंने फिर कहा कि बच्चों को वास्तविक बचपन चाहिए। शक्तिशाली परिवार चाहिए। स्क्रीन लत से दूर रहना चाहिए। उनका कहना था कि भारत को भी इस दिशा में सोचना चाहिए, दूसरे देशों का उदाहरण देते हुए।

ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व

दिसंबर 2025 से ऑस्ट्रेलिया एक महत्वपूर्ण बदलाव करेगा। 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया का उपयोग करना वर्जित था। इंस्टाग्राम, फेसबुक, टिकटॉक, रेडिट और स्नैपचैट जैसे वेबसाइटों को बच्चों के लिए बंद कर दिया गया है। इस निर्णय पर विश्व भर में बहस हुई। सोनू सूद ने भी भारत सरकार से इसी तरह अपील की थी।

माता-पिता के सामने एक महत्वपूर्ण प्रश्न

गाजियाबाद की घटना ने माता-पिता को कई प्रश्न उठाए हैं। हम बच्चों को पर्याप्त समय दे पा रहे हैं? हम उनके दोस्त बन सकते हैं? या मोबाइल को ही अपना दोस्त बनाया है। आज बहुत से घरों में बच्चे चुप हैं। लेकिन उनके मन में शोर है। स्क्रीन यह शोर पैदा करती है।

स्कूल और समाज का दायित्व

यह सिर्फ माता-पिता की नहीं है। स्कूलों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। स्कूल ही बच्चों को सही और गलत का ज्ञान देता है। समाज भी जागरूक होना चाहिए। ऑनलाइन गेम और सोशल मीडिया का खतरा बहुत बड़ा है। मनोरंजन के साथ-साथ यह एक बड़ा खतरा भी बन गया है।

पुलिस जांच और अगले कदम

इस मामले को पुलिस गहराई से जांच कर रही है। मोबाइल फोन, गेम और चैट का इतिहास जांच किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि हर पहलू को परीक्षण किया जाएगा। ताकि सच्चाई उजागर हो सके साथ ही कोशिश की जाती है कि ऐसी घटनाएं फिर कभी न हों।

एक दर्दनाक ज्ञान

गाजियाबाद की घटना एक संकेत है। यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे तकनीक हमारे जीवन में आ रही है, उतना ही उसका सही तरीके से उपयोग करना भी महत्वपूर्ण है। बच्चे बहुत भावुक होते हैं। उनका दिमाग बहुत जल्दी बहकता है। उन्हें मार्गदर्शन, प्यार और समय चाहिए।

उत्कर्ष

पूरे देश को तीन छोटी बहनों की मौत ने विचार करने पर मजबूर कर दिया है। सोनू सूद की आवाज दर्द को और भी बढ़ाती है। सवाल स्पष्ट है। हम अभी भी चुप रहेंगे? या फिर बच्चों को सही और कठोर निर्णय देंगे। जागने का समय है। अब कार्रवाई करने का समय है। ताकि कोई और घर ऐसा न हो।

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