जो डर गया, वही लुट गया: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कैसे खेला जा रहा है दिमाग से खतरनाक खेल
एक कॉल आता है। सामने से एक कठोर आवाज आती है। आप पर केस बताया गया है। आपका नाम एक गंभीर अपराध से जुड़ा हुआ है। दिल की धड़कन तेज होने लगती है। तुम्हारा दिमाग सुन्न हो जाता है। डर इतना गहरा हो जाता है कि आदमी अपने विचारों को खो देता है। आज डर सबसे बड़ा हथियार बन गया है। डिजिटल अरेस्ट नामक हथियार है।
डिजिटल अरेस्ट के लिए कोई नियम नहीं है। भारत का कानून ऐसा नहीं कहता। फिर भी लोग हर दिन इसके नाम पर अपनी पूरी जिंदगी की कमाई खो देते हैं। यह सिर्फ पैसे की कहानी नहीं है। यह कहानी भय, झूठ बोलने और मन को कैद करने की है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट और यह सच क्यों नहीं है?
डिजिटल अरेस्ट लगता है कि कानूनी शब्द है। लेकिन सत्य स्पष्ट है। भारत में पुलिस को फोन या वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। सरकारी विभाग या अदालत ऐसा आदेश नहीं देते।
फिर भी साइबर ठग लोगों को इसी झूठ से फंसा रहे हैं। वे CBI अफसर बताते हैं। कभी-कभी पुलिस बन जाते हैं। कभी-कभी आयकर अधिकारी वे सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह वीडियो कॉल करते हैं।
उन्हें रौब आता है। चेहरे में नकली वर्दी है। पीछे फर्जी दफ्तर है। सब कुछ इतना सही लगता है कि कोई संदेह नहीं रहता।
माइंड अरेस्ट डर से शुरू होता है
पैसे से नहीं, मन से खेल शुरू होता है। इंसानों को पहले साइबर ठग डराते हैं। आपको बताया गया है कि आपका बैंक खाता बंद हो जाएगा। आप जेल में जाएंगे। आपके परिवार को भी समस्याएं होंगी।
आदमी डर से किसी से बात नहीं करता। फोन काटने का साहस नहीं है। यही समय है जब दिमाग पूरी तरह घिरे हुए हैं। साइबर एक्सपर्ट माइंड अरेस्ट इसे ही कहते हैं।
जो भयभीत था, वही गिर गया। सवाल जो पूछता है, बच जाता है।
दिल्ली का डॉक्टर और 14 करोड़ की कहानी
दिल्ली की डॉक्टर इंदिरा तनेजा की कहानी इस ठगी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। एक दिन उन्हें फोन किया गया था। TRAI ने कहा कि यह फोन है। बताया गया कि उनके नाम पर गलत सिम का उपयोग किया जा रहा है।
फिर कॉल को मुंबई पुलिस स्टेशन से जोड़ा गया। वहीं से मनी लॉन्ड्रिंग मामला उठाया गया। FIR पेश करने की धमकी दी गई थी। वीडियो कॉल में फर्जी जज दिखाई दिया।
Dr. Taneja और उनके पति ने डर इतना बढ़ा कि किसी से बात नहीं की। न अपने परिवार, दोस्त, वकील या पुलिस से।
कुछ ही दिनों में 14 करोड़ रुपए से अधिक उनके खातों से बाहर निकल गए। सब खत्म हो गया जब वे सच्चाई को समझ गए।
पटना और पंजाब में महत्वपूर्ण मामले
पटना में एक डॉक्टर दंपत्ति के साथ ऐसा ही हुआ। कई दिनों तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। वीडियो कॉल हर दिन आते थे। कभी CBI अफसर, कभी जज
दबाव और भय के कारण उन्होंने भी कुछ नहीं कहा। नतीजतन, २ करोड़ २० लाख रुपये खाते से उड़ गए।
पंजाब पुलिस के पूर्व आईजीजी अमर सिंह से 8 करोड़ रुपये ठगे गए। रिटायर्ड अफसर रमेश चंद्र भी इसी जाल में फंसे हुए हैं। यह स्पष्ट है कि ठग भी पढ़े-लिखे और अनुभवी लोगों को आसानी से फंसा लेते हैं।
साइबर ठगों को सीधे रुपये क्यों नहीं मिलते?
इस ठगी की प्रक्रिया अत्यंत चतुर है। पैसे भेजना ठग कभी सीधे नहीं कहते। पहले वे भरोसा करते हैं। फिर भय दिखाता है। फिर नियमों की बात करते हैं।
जब व्यक्ति पूरी तरह टूट जाता है, तो उसे जांच के लिए धन सुरक्षित खाते में भेजना चाहिए। कहा जाता है कि जांच समाप्त होने पर पैसे वापस मिल जाएंगे।
डर से लोग कुछ भी करते हैं।
हर दिन हजारों लोग शिकार होते हैं
देश में हर दिन 30 से 35 हजार साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज होती हैं, बकौल साइबर एक्सपर्ट अमित दुबे। 2023 में साइबर फ्रॉड के 22 लाख मामले सामने आए।
यह आंकड़ा बहुत भयानक है। भविष्य में यह 50 लाख तक पहुंच सकता है। इसका अर्थ है कि खतरा बढ़ रहा है और ठग अधिक चालाक हो रहे हैं।
लूटा गया धन आखिर कहां जाता है?
भारत में डिजिटल अरेस्ट से लूटा गया पैसा रुकता नहीं है। जांच ने बहुत बड़ा अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क पाया है। 37 साल का चेन जी इस नेटवर्क का बड़ा नाम है।
Chen Zhi का जन्म चीन में हुआ था। उसने कम्बोडिया की नागरिकता ली। यहीं से साइबर ठगी का बड़ा खेल शुरू हुआ।
उसका नेटवर्क भारत से यूरोप, चीन और अमेरिका तक फैला हुआ था।
कंबोडिया में ठगी का एक साम्राज्य
Prince Holding Group ने चेन जी को रियल एस्टेट, बैंकिंग और लग्जरी ब्रांड्स में निवेश करने का मौका दिया। डिजिटल अरेस्ट से चोरी की गई रकम प्रिंसिपल बैंक में पहुंचती थी।
कंबोडिया और उसके आसपास बड़े स्कैम सेंटर बनाए गए। विभिन्न देशों से लोगों को वहां लाकर ठगी करवाई जाती थी।
जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच कंबोडिया में 118 स्कैम सेंटरों पर छापे डाले गए। 23 देशों में लगभग 5 हजार लोग हिरासत में लिए गए।
गिरफ्तारी के बाद भी खतरा बना रहता है क्यों?
चेन जी की गिरफ्तारी ने नेटवर्क को हिला दिया। फिलहाल, चीन उसकी निगरानी कर रहा है। लेकिन जोखिम कम नहीं हुआ है।
म्यानमार, थाईलैंड और कंबोडिया में अभी भी कई स्कैम सेंटर सक्रिय हैं। पुराने ठगों को नए नाम देकर फिर से इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैसे बचें डिजिटल जाल से
भयभीत नहीं होना सबसे महत्वपूर्ण है। फोन पर कोई सरकारी एजेंसी गिरफ्तार नहीं करती। वीडियो कॉल पर कोई जज आदेश नहीं देता। पैसे को कोई विभाग नहीं देता।
अगर कोई फोन डर पैदा करता है, तो उसे काट दें। परिवार के साथ चर्चा करें। पुलिस को फोन करें। साइबर हेल्पलाइन पर शिकायतें भेजें।
ठगों का सबसे बड़ा हथियार डर है। आपका सबसे बड़ा हथियार है प्रश्न करना।
उत्कर्ष
डिजिटल अरेस्ट कानून एक बड़ा झूठ है। डर से झूठ सच बनाया जाता है। जो डर गया, वह गिर पड़ा। जो जागरूक था, उसे बचाया गया।
आज सतर्कता की जरूरत है। जानकारी प्राप्त की। और सही समय पर आवाज़ उठाना। डर को हराना सीखने से साइबर ठग खुद हार जाएंगे।