UPI पेमेंट रहेगा फ्री या लगेगा चार्ज? सरकार ने साफ किया रुख, जानिए पूरी कहानी
आज भारत में डिजिटल भुगतान हर दिन की आदत बन गया है। किराने की दुकान से बड़े मॉल तक, हर जगह लोग मोबाइल फोन से भुगतान कर रहे हैं। UPI इसका सबसे बड़ा नाम है। बीते कुछ समय से यह सवाल बार-बार उठता रहा कि क्या UPI से भुगतान करना महंगा हो जाएगा। क्या आम लोगों को हर बार भुगतान करना होगा? अब सरकार ने इस पर अपना उत्तर स्पष्ट कर दिया है।
UPI शुल्क पर सवाल क्यों उठाया
पिछले एक साल से डिजिटल भुगतान कंपनियां और बैंकों ने कहा कि UPI को चलाना महंगा नहीं है। हर पेमेंट में सिस्टम, सुरक्षा और तकनीक की लागत शामिल हैं। उनका कहना था कि करोड़ों ट्रांजेक्शन प्रतिदिन होते हैं, इसलिए खर्च भी बढ़ता है। इसलिए उन्होंने UPI पर कर लगाने की मांग की थी।
लेकिन सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा कि आम लोगों और छोटे व्यापारियों पर कोई भार नहीं डाला जाएगा। सरकार चाहती है कि डिजिटल भुगतान सरल और मुफ्त हो जाए।
सरकार का महत्वपूर्ण निर्णय
वित्त मंत्रालय ने फिनटेक कंपनियों और बैंकों की मांग को खारिज कर दिया है। सरकार कहती है कि UPI अभी भी निःशुल्क रहेगा। इसका उद्देश्य स्पष्ट है। डिजिटल भुगतान से भयभीत होने पर लोग कैश की ओर लौट जाएंगे। इससे डिजिटल भारत का सपना धराशायी होगा।
सरकार ने २०२२-२७ और २०२६-२७ के आम बजटों में इसी विचारधारा से बहुत कुछ किया है। रुपे डेबिट कार्ड और यूपीआई से लेन-देन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। इससे बैंकों का खर्च कुछ हद तक कम हो सकेगा।
MDR क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों है?
MDR, डिजिटल भुगतान का एक आम शब्द है। यह मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। बैंकों और भुगतान कंपनियों को कुछ खर्च करना पड़ता है जब ग्राहक डिजिटल भुगतान करता है।
MDR मॉडल के तहत सरकार इस व्यय का बड़ा हिस्सा खुद उठाती है। इससे दुकानदारों और खरीदारों दोनों को लाभ होता है। पिछले बजट में इस उद्देश्य के लिए 437 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। इसे बाद में 2,196 करोड़ रुपये कर दिया गया।
बड़े भुगतान पर भी शुल्क नहीं लगेगा
यह भी चर्चा हुई कि बड़े पैमाने पर UPI भुगतान पर अधिक शुल्क लगाया जा सकता है। लेकिन इस प्रस्ताव को भी सरकार ने फिलहाल रोक दिया है। यानी अगर आप भी UPI से बड़ी रकम भेजते हैं, तो आपको अभी कोई चार्ज नहीं देना होगा।
जबकि आम जनता इस निर्णय से खुश है, बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इससे निराशा है। उनका कहना है कि सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए उन्हें अधिक संसाधनों की जरूरत है।
बैंकों और फिनटेक कंपनियों का संकट
आज UPI रोज़ाना ३० करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन करता है। सुरक्षित रूप से इतनी बड़ी संख्या को प्रोसेस करना मुश्किल है। इसमें सर्वर, तकनीक और धोखाधड़ी रोकने की लागत शामिल हैं।
बैंकों ने कहा कि हर डिजिटल भुगतान पर औसतन दो रुपये लगते हैं। वर्तमान व्यवस्था इस खर्च को पूरा नहीं कर सकती। इसलिए वे शुल्क की बात कर रहे थे।
RBI के आंकड़े बताते हैं
भारतीय रिज़र्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि UPI के 86 प्रतिशत लेन-देन 500 रुपये से कम हैं। यानी अधिकांश लोग छोटी रकम देते हैं।
छोटे पैसे के इतने ज्यादा ट्रांजेक्शन सिस्टम पर अधिक प्रभाव डालते हैं। इससे लागत बढ़ती है। इसके बावजूद सरकार छोटे भुगतान पूरी तरह मुफ्त करना चाहती है।
बड़े व्यापारियों की आवश्यकता
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया, पेमेंट कंपनियों का एक संगठन, ने सुझाव दिया कि बड़े व्यापारियों से थोड़ा शुल्क लिया जाए। व्यापारियों पर 0.2 से 0.3 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की घोषणा की गई थी जिनका टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से अधिक था।
उनका दावा था कि आम लोगों और छोटे व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। लेकिन अभी भी सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।
सरकार का स्पष्ट सन्देश
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल उपयोगकर्ताओं पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। भविष्य में आवश्यकता होने पर फिर से चर्चा की जाएगी। लेकिन सरकार का रुख अभी भी स्पष्ट है।
सरकार का मानना है कि आम लोगों का भरोसा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में सबसे महत्वपूर्ण है। यदि भरोसा टूट जाएगा, तो पूरी व्यवस्था प्रभावित होगी।
UPI की रिकॉर्ड स्तर पर लोकप्रियता
UPI भारत में लगातार लोकप्रिय हो रहा है। UPI ने जनवरी 2026 में 2,170 करोड़ लेन-देन दर्ज किए थे। इनका कुल मूल्य 28.33 मिलियन डॉलर था।
दिसंबर 2025 की तुलना में यह आंकड़ा अधिक है। उस महीने 2,163 करोड़ रुपये (27.97 लाख करोड़ रुपये) के ट्रांजेक्शन हुए।
करोड़ों लेन-देन हो रहे हैं
इन आंकड़ों में स्पष्ट अर्थ है। दैनिक रूप से 70 करोड़ से अधिक वित्तीय लेन-देन होते हैं। UPI हर दिन करीब 91,403 करोड़ रुपये का भुगतान करता है।
यह UPI पर लोगों का भरोसा दिखाता है। यह गांव से शहर तक हर जगह बढ़ रहा है।
भविष्य में क्या होगा?
फिलहाल आम जनता को राहत मिली है। UPI से भुगतान करना बिल्कुल फ्री नहीं होगा। सरकार चाहती है कि डिजिटल भुगतान अधिक तेज़ी से फैले।
सरकार और संबंधित संस्थाएं मिलकर कोई समाधान निकाल सकते हैं अगर सिस्टम की लागत बाद में बहुत बढ़ जाएगी। लेकिन फिलहाल, संदेश स्पष्ट है। UPI आम लोगों के लिए है और मुफ्त रहेगा।
उत्कर्ष
भारत में पैसे भेजने और लेने की प्रक्रिया को UPI ने बदल दिया है। सरकारी निर्णय से डिजिटल भुगतान और मजबूत होगा। आम लोगों को UPI का इस्तेमाल करने में कोई परेशानी नहीं होगी।
जब तक सरकार का सहयोग जारी रहेगा, तब तक UPI भी चलेगा। यही भारत का डिजिटल भविष्य है।