RBIs strict noose on recovery agents

अब नहीं चलेगी गुंडागर्दी! रिकवरी एजेंट्स पर RBI का सख्त शिकंजा, जानिए आपके अधिकार

यदि आप पर लोन है और कभी-कभी आपको रिकवरी एजेंट का फोन या घर पर आना डराता था, तो अब आपको राहत मिलेगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ नए नियम बनाए हैं। इन नियमों का प्रयोजन स्पष्ट है। अब कोई एजेंट कर्जदार को धमका नहीं सकता। धमकी, गाली, दबाव नहीं। बैंकों को अब अपनी ज़िम्मेदारी याद दिला दी गई है और नियम सख्त हैं।

नए नियमों की आवश्यकता क्यों थी?

देश भर से बहुत सी शिकायतें आईं। लोगों ने दावा किया कि रिकवरी एजेंट उन्हें परेशान करते हैं। कुछ बार एजेंट ने घर जाकर रोया। परिवार को किसी ने डराया। कई जगहों पर अपशब्द प्रयोग किए गए। यह भी कहा गया कि दबाव इतना बढ़ गया कि लोगों ने गलत निर्णय लिए।

इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक ने हस्तक्षेप किया। आरबीआई ने स्पष्ट रूप से कहा कि लोन वसूली आवश्यक है, लेकिन मानवता उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। ऋण का भुगतान सम्मानपूर्वक और कानून के दायरे में होना चाहिए।

नियम किन संस्थाओं पर लागू होंगे?

देश के सभी बड़े वित्तीय संस्थानों पर ये नियम लागू होंगे। इसमें सहकारी बैंक, एनबीएफसी, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, ग्रामीण बैंक और बैंक शामिल हैं। यानी इन नियमों के दायरे में आने वाले रिकवरी एजेंट, अगर आपने कहीं से भी लोन लिया है

अब कोई भी एजेंट बेवकूफ नहीं होगा।

बैंकों को स्पष्ट नीति बनानी होगी

आरबीआई ने कहा कि सभी बैंकों को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। इस नीति में कौन रिकवरी एजेंट होगा, उसकी योग्यता क्या होगी और कैसे व्यवहार किया जाएगा।

बैंक को एजेंट की पृष्ठभूमि जांचनी चाहिए। जांच के बिना कोई काम नहीं दिया जा सकता। बैंक को भी एजेंट का रिकॉर्ड साफ होना चाहिए।

अब भी निगरानी आवश्यक होगी। बैंक अपने एजेंट की निगरानी करेगा। बैंक नियमों का उल्लंघन करेगा।

प्रशिक्षण होगा आवश्यक

अब कोई सीधे रिकवरी एजेंट नहीं बन सकता है। उसे शिक्षित होना चाहिए। Indian Institute of Banking and Finance से डेब्ट रिकवरी एजेंट का प्रमाणपत्र लेना आवश्यक होगा।

इसका अर्थ है कि एजेंट को बोलने का तरीका सिखाया जाएगा। कानून का पालन करने के तरीके और ग्राहकों को सम्मान देना

आचार संहिता में कठोरता

हर बैंक को आचार संहिता बनानी चाहिए। इसमें स्पष्ट रूप से लिखा गया होगा कि एजेंट क्या कर सकता है और क्या नहीं कर सकता है। एजेंट को लिखित में जानकारी दी जानी चाहिए कि वह नियम मानेगा।

बैंक को कार्रवाई करनी होगी अगर कोई एजेंट कानून तोड़ेगा। उसका समझौता खत्म हो सकता है। वह भी सजा पा सकता है।

अब बैंक और एजेंट दोनों जिम्मेदार होंगे।

वेबसाइट पर एजेंट की जानकारी दिखाई देगी

अब बैंक को शाखा, मोबाइल ऐप और वेबसाइट पर प्रत्येक रिकवरी एजेंट की पूरी जानकारी दिखानी होगी। इसमें एजेंट का नाम, संपर्क नंबर और अनुबंध की अवधि शामिल होंगे।

बैंक को किसी एजेंट का अनुबंध खत्म होने पर उसकी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। यह ग्राहकों को बताता है कि सामने खड़ा व्यक्ति वास्तव में अधिकारी है या नहीं।

अब फर्जी एजेंट बनकर कोई घर नहीं आ सकता।

रिकवरी से पहले जानकारी देना आवश्यक है

पहले ग्राहक को बैंक को बताना होगा कि उसका केस किस एजेंट को भेजा गया है। यह जानकारी पत्र, एसएमएस या ईमेल से दी जाएगी।

ग्राहक को तुरंत जानकारी दी जाएगी अगर एजेंट बदल जाता है।

अब घर पर अचानक कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता।

आपकी जानकारी सुरक्षित रहेगी।

ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित रखी जाएगी। बैंक केवल आवश्यक जानकारी देगा।

आपकी जानकारी को एजेंट गलत नहीं कर सकता। सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकता। नहीं कर सकता दोस्तों या रिश्तेदारों को फोन करना।

अब कानून आपकी गोपनीयता और इज्जत की रक्षा करता है।

शिकायत करने पर रिकवरी रुक जाएगी

ग्राहक बैंक में शिकायत दर्ज कर सकता है अगर वह एजेंट के व्यवहार से परेशान है। बैंक को वसूली की कार्रवाई जैसे ही शिकायत दर्ज होगी रोकनी होगी।

जब तक शिकायतों का समाधान नहीं होता, दबाव नहीं बनाया जा सकता।

प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकता है अगर शिकायत झूठी है। लेकिन ग्राहक को राहत मिलेगी तब तक।

संपर्क समय पर होगा

अब सुबह 8 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद एजेंट से संपर्क नहीं होगा। अब देर रात फोन बंद होंगे।

यदि ग्राहक चाहता है कि किसी विशिष्ट समय पर फोन न करें, तो एजेंट को उसे मानना होगा।

ग्राहक चाहते स्थान पर संपर्क होगा। अगर ग्राहक ने कोई स्थान नहीं बताया है, तो वे अपने घर या कार्यस्थल पर संपर्क कर सकते हैं।

दुःख के समय, जैसे परिवार की मौत, शादी या छुट्टी, एजेंट को फोन या विजिट नहीं करना चाहिए।

बातचीत की रिकॉर्डिंग होगी

अब रिकवरी कॉल दर्ज की जाएंगी। ग्राहक को पहले सूचित किया जाएगा कि बातचीत कैद हो रही है।

दोनों पक्ष इससे सुरक्षित रहेंगे। अगर कोई बहस होती है, तो रिकॉर्ड काम करेगा।

माइक्रोफाइनेंस लोन में रिकवरी निश्चित स्थान पर होगी। यदि ग्राहक दो बार नहीं आता, तो उन्हें घर या कार्यस्थल पर जाना पड़ेगा।

कठोर व्यवहार को पूरी तरह से रोकें

नए नियमों के अनुसार, एजेंट गाली नहीं दे सकता। धमकी देने में असमर्थ है। झूठी सूचना नहीं दे सकता। शारीरिक हिंसा की धमकी भी अपराध होगी।

सोशल मीडिया पर दोस्तों को फोन करना, परिवार को परेशान करना या शर्मिंदा करना सख्त मना है।

भयभीत होकर पैसे वसूलने का समय खत्म हो गया।

क्या करें अगर एजेंट घर आ जाए?

सबसे पहले, चिंता मत करो। शांति बनाए रखें। उनसे पहचान पत्र दिखाने को कहा जाना चाहिए। उनका नाम और बैंक विवरण प्राप्त करें।

बैंक के ऐप या वेबसाइट पर जाकर एजेंट का नाम देख सकते हैं।

आप मना कर सकते हैं अगर वह तय समय से बाहर आया है। वह आपसे बदतमीजी करे तो तुरंत शिकायत करें।

आप अधिकारी हैं। कानून आपकी सुरक्षा करता है।

अब क्या होगा?

इन नियमों से बहुत कुछ बदल जाएगा। अब वसूली की प्रक्रिया अधिक साफ होगी। बैंक अधिक जिम्मेदार हो जाएंगे। एजेंट को बहुत सोच-समझकर बोलना होगा।

कर्ज चुकाना अनिवार्य है। लेकिन सम्मानपूर्वक जीना उससे भी महत्वपूर्ण है। आरबीआई ने यह कार्रवाई उसी दिशा में की है।

अब उम्मीद है कि रिकवरी का अर्थ संवाद की जगह डर होगा। लोग बोल सकेंगे। बैंक भी उपाय खोज सकेंगे।

देश भर में लाखों लोग लोन लेते हैं। हर कोई हर समय भुगतान करना चाहता है। लेकिन परिस्थितियां कभी-कभी साथ नहीं आती। ऐसे समय में समझदारी और सहानुभूति की जरूरत होती है।

यह नए नियम बताते हैं। इंसानियत और कानून दोनों सख्त हैं।

नियम अब रिकवरी एजेंट की जगह लेंगे।

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