UGCs new rules

‘देश के हित में नहीं’— UGC के नए नियमों पर बृजभूषण शरण सिंह का विरोध, करन भूषण सिंह ने दिया साफ संदेश

देश में शिक्षा नियमों में किसी भी बदलाव पर बहस तेज होती है। इस बार, यूजीसी का नया नियम चर्चा का विषय बन गया है। इस नियम का पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने तीव्र विरोध जताया है। उन्हें लगता है कि यह देश के हित में नहीं है। साथ ही कैसरगंज से सांसद करन भूषण सिंह ने स्पष्ट रूप से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वे कहते हैं कि वे इस नियम को नहीं बनाया था, लेकिन वे चाहते हैं कि भेदभाव समाज में न फैले। अब पूरा मुद्दा गांव से लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।

यूजीसी के नए नियमों पर बहस का कारण

यूनिवर्सिटी ग्रेड्स कमीशन (यूजीसी) के हाल के नियमों को लेकर देश भर में सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि इस नियम से समाज को विभाजित किया जा सकता है। बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व सांसद, ने कहा कि यह नियम बच्चों के बीच भेदभाव पैदा कर सकता है। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य जोड़ना होता है, नहीं तोड़ना।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आंदोलन भी किया जा सकता है अगर यह नियम वापस नहीं लिया गया। उनका दावा है कि इस आंदोलन में हर वर्ग का व्यक्ति भाग लेगा। इसमें पढ़े-लिखे एससी, ओबीसी और सवर्ण भी शामिल होंगे।

वृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया और चिंता

वृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वे यूजीसी एक्ट 2026 को लेकर चल रहे विवाद को कई दिनों से देख रहे हैं। उनका विचार है कि नए नियम में ऐसे प्रावधान हैं जो समाज को गलत संदेश देते हैं। उनका दावा था कि गांवों में बच्चे वर्षों से एक साथ खेलते आए हैं। वे जाति नहीं देखकर एक-दूसरे को दोस्त मानते हैं।

उनका कहना है कि बच्चों को जातिवादी भावना देने से भाईचारा खत्म हो जाएगा। उनका कहना था कि इससे प्यार और समाज में दूरी बढ़ेगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि दफ्तर में बैठकर निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि गांवों में जाकर समाज को समझना चाहिए।

विरोध की चेतावनी

पुराने सांसदों ने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर आवश्यक हो तो वे आंदोलन करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी विशेष वर्ग का नहीं होगा। हर वर्ग इसमें भाग लेगा। उनका कहना है कि क्योंकि यह मुद्दा पूरे समाज से जुड़ा है, सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।

साथ ही उन्होंने कहा कि नए नियम ने समाज में भ्रम फैलाया है। लोगों को पता नहीं है कि नियम क्या करेगा। इस भ्रम से लोग डर रहे हैं और परेशान हैं।

बच्चों और समाज पर प्रभाव

वृजभूषण शरण सिंह ने बच्चों की चर्चा की। उनका कहना था कि हमारे देश का भविष्य बच्चे हैं। जब उन्हें बचपन से ही जाति के चश्मे से देखना सिखाया जाता है, तो समाज आगे चलकर टूट सकता है। उनका कहना था कि आज गांवों में सभी जातियों के बच्चे मिलकर पढ़ते और खेलते हैं। यह भारत का बल है।

उनके भाषणों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा भी शामिल थी। उनका कहना था कि पिछड़ों को आगे लाना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि समाज विभाजित हो जाए।

पुरानी वाटिका की परियोजना

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने बयान में और कुछ कहा। उनका कहना था कि वे एक पुरातन वाटिका बनाने जा रहे हैं। उनका दावा है कि सनातन धर्म सभी को एकजुट करता है। उन्होंने पहले राष्ट्रकथा लिखी थी, और अब उसी विचार से यह नया काम करने जा रहे हैं।

उन्होंने सवर्णों से कहा कि वे अनुसूचित वर्ग और ओबीसी लोगों से बातचीत करें। उन्हें भी इस नियम को वापस लेने का आह्वान करें। उनका मानना है कि समाधान सिर्फ बातचीत से मिल सकता है।

करन भूषण सिंह का स्पष्ट उत्तर

इस पूरे मामले में कैसरगंज से सांसद करन भूषण सिंह ने भी अपना बयान दिया है। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट ने उनकी बात बताई। उनका दावा था कि इंटरनेट मीडिया और टीवी चैनल उनके खिलाफ झूठ बोल रहे हैं।

उन्हें स्पष्ट किया कि संसदीय स्थायी समिति, जिसमें वे शामिल हैं, यूजीसी के इन नए नियमों को बनाने में उनका कोई योगदान नहीं था। उनका कहना था कि ऐसी बातें बिना उनका पक्ष जाने फैलाना गलत है।

जनभावना का सम्मान करना आवश्यक है

Karan Bhushan Singh ने कहा कि उनकी भावनाएं समाज के साथ हैं। उन्होंने यूजीसी से अपील की कि वह लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखें। उनका कहना है कि नियमों को फिर से सोचना चाहिए। उनमें सुधार भी होना चाहिए अगर आवश्यक हो।

उन्हें यह भी कहा कि शिक्षण संस्थानों को जातीय संघर्षस्थल नहीं बनना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान प्रदान करना है, न कि समाज को साझा करना है।

शिक्षा और एकता

इस पूरे बहस ने फिर से शिक्षा नीति बनाने का प्रश्न उठाया है। कई लोगों का मानना है कि नियम बनाते समय वास्तविकता को समझना आवश्यक है। गावों, कस्बे और छोटे शहरों का विचार अलग है। वहाँ लोग एक दूसरे के साथ रहना पसंद करते हैं।

जब नियम लोगों को भयभीत करते हैं, तो समाज को नुकसान होता है। यही कारण है कि इस विषय पर व्यापक बहस हो रही है।

सोशल मीडिया में बहस

यूजीसी के नवीनतम नियम भी सोशल मीडिया पर बहुत चर्चा में हैं। कुछ लोग इसे सही बताते हैं, जबकि दूसरे इसका विरोध करते हैं। लोग टिप्पणियों, वीडियोओं और पोस्टों के माध्यम से अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। यह स्पष्ट है कि राजनीति अब यह मुद्दा नहीं है।

भविष्य में क्या होगा?

यूजीसी अब सबका ध्यान है। लोग जानना चाहते हैं कि इन नियमों पर फिर से विचार किया जाएगा या नहीं। क्या यूजीसी और सरकार जनता की बात सुनेंगे? बृजभूषण शरण सिंह आंदोलन और करन भूषण सिंह की अपील के बाद दबाव निश्चित रूप से बढ़ा है।

उत्कर्ष

यूजीसी के नए नियम को लेकर चल रही बहस सिर्फ कानून नहीं है। यह समाज का विचार, बच्चों का भविष्य और देश की एकता से संबंधित है। बृजभूषण शरण सिंह और करन भूषण सिंह ने अपनी चिंता व्यक्त की है। जब एक ने कठोर विरोध किया, तो दूसरा सुधार की बात करने लगा।

अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या निर्णय होता है। लेकिन शिक्षा से संबंधित किसी भी निर्णय में जनता की राय सुनना अनिवार्य है। लोकतंत्र शक्ति है और देश को आगे बढ़ाने का रास्ता है।

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