₹2.5 लाख करोड़ उड़ गए! भारत के राहुल पाटिल का ‘Patil Effect’ और AI का तूफान
वर्तमान में टेक्नोलॉजी क्षेत्र में तेजी से बदलाव हुआ है। शेयर बाजार में मंदी है। प्रमुख निवेशक चिंतित हैं। वजह है एक भारतीय नाम और एक नवीनतम artificial intelligence टूल। कुछ ही दिनों में भारत की आईटी कंपनियों का लगभग ₹2.5 लाख करोड़ का मार्केट वैल्यू साफ हो गया। अमेरिका भी अरबों डॉलर खो बैठा। लोग सवाल उठाते हैं: आखिर क्या हुआ? साथ ही, यह “Patil Effect” क्या है?
यह कहानी है AI के विकास की। यह बदलाव और भय की कहानी है। यह भी बेंगलुरु की कहानी है, जहां एक विचार ने पूरे क्षेत्र को सोचने पर मजबूर कर दिया।
क्या है “SaaSpocalypse” और इसके डर का कारण?
टेक जगत में SaaSpocalypse नामक एक नया शब्द चर्चा में है। यह SaaS कंपनियों को कठिन समय देता है। SaaS का अर्थ है सॉफ्टवेयर एज-ए-सर्विस। ये कंपनियां सॉफ्टवेयर सेवाएं प्रदान करती हैं। डेटा मैनेजमेंट, क्लाउड, अकाउंटिंग, लीगल सॉफ्टवेयर आदि
AI टूल्स अब खुद ही ऐसा करने लगे हैं। यह पहले आदमी करता था। इसके बाद कंपनियां करती थीं। मशीनें अब काम कर रही हैं। निवेशकों को यही भय है।
जब बाजार ने सोचा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंसानों की जगह ले सकती है, तो शेयरों में भारी बिकवाली हुई। Nifty IT इंडेक्स भारत में लगभग 8 प्रतिशत गिर गया। सिर्फ तीन दिन में ₹2.5 लाख करोड़ खत्म हुए। यह छोटा नहीं है।
आईटी शेयरों में भूचाल
अमेरिका में परिस्थितियां और भी तेज हो गईं। एक दिन में करीब 300 अरब डॉलर का मार्केट मूल्य साफ हुआ।
Apple के शेयरों में 1.29 प्रतिशत की गिरावट आई और 274.53 डॉलर पर आ गई।
Meta स्टॉक्स भी गिरे।
Amazon के शेयरों में 10% का गिरावट हुई, जो आठ महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया।
LegalZoom में 20% की गिरावट हुई।
EPAM सिस्टम भी 12 प्रतिशत से अधिक टूट गए।
Thomson Reuters और Expedia Group जैसे नाम भी नहीं बच पाए।
सरल था। बाजार भयभीत था।
इस घटना की प्रेरणा कौन है?
कथा के दौरान एक कंपनी का नाम आया: Anthropic। यह एक AI startup है। उसने Claude नामक अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पाठ्यक्रम का नवीनतम संस्करण जारी किया।
अब क्लाउड सिर्फ प्रश्नों का जवाब नहीं देता। वह अपने आप काम करता है।
अब क्लाउड कानूनी कॉन्ट्रैक्ट पढ़ सकता है। कोड को समझ सकता है। डेटा विश्लेषण करने की क्षमता है। पूरे कार्यालय को संभाल सकता है।
यही बदलाव सबसे बड़ा धक्का था।
राहुल पाटिल को चर्चा का विषय क्यों बनाया गया?
Rahul Patil तेजी से इस AI बदलाव के पीछे आया। अक्टूबर 2025 से Anthropic में Chief Technology Officer हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कंपनी की इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी टीम को पूरी तरह से बदल दिया। उन्होंने महंगे चिप्स से अधिक काम निकालने की कोशिश की। वे प्रणाली को तेज करते थे। उन्होंने खर्च कम किया।
उनके काम का प्रभाव स्पष्ट है। Claude अब अधिक तेज है। अधिक लागत है। अधिक बलशाली है।
इस बदलाव को वॉल स्ट्रीट पर “Patil Effect” कहा जाता है।
कूल्ड इंटेलिजेंस ने क्या किया?
Claude का नवीनतम संस्करण सिर्फ एक चैटबॉट नहीं है। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एजेंट की तरह काम करता है।
उसके पास कानूनी दस्तावेजों की जांच करने का अधिकार है।
उसके पास सेल्स रिपोर्ट बनाने की क्षमता है।
वह मार्केटिंग डेटा का विश्लेषण कर सकता है।
उसे कोड ठीक करने की क्षमता है।
AI अब बड़ी आईटी कंपनियां की तरह काम कर सकता है। इससे कम कर्मचारियों में अधिक काम मिलेगा। लागत कम होगी। समय होगा।
लेकिन हर लाभ भी खतरा बन सकता है। यही खतरे की घंटी है जो आईटी क्षेत्र में है।
दो प्रमुख ट्रिगर जो भय उत्पन्न करते थे
इस गिरावट के दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
पहली वजह है Claude Cowork नामक एक नवीनतम कृत्रिम बुद्धिजीवियों का एजेंट। Anthropic ने भी इसे लॉन्च किया था। यह खुद लीगल, बिक्री, मार्केटिंग और डेटा कार्य कर सकता है। ये वही क्षेत्र हैं जहां आईटी कंपनियां सबसे अधिक पैसा कमाती हैं।
Palantir का दावा दूसरा कारण है। कम्पनी ने कहा कि SAP माइग्रेशन जैसे बड़े कामों को सालों की जगह हफ्तों में पूरा कर सकता है। AI अब ERP जैसे सुरक्षित क्षेत्रों को भी प्रभावित करने लगा है।
निवेशक भयभीत हो गए। उन्हें लगता था कि बड़े सौदे कम हो सकते हैं।
‘Patil Effect’ क्या है?
Rahul Patil ने सिर्फ एक गलती नहीं की। उनका विचार पूरी तरह से बदल गया।
उन्हें सिस्टम बनाया गया था ताकि महंगे चिप्स से अधिक काम किया जा सके। स्मृति प्रबंधन में सुधार प्रोसेसिंग तेज किया गया। कम खर्च किया।
अब कंपनी एक AI एजेंट दे सकती है जो “हमेशा ऑन” है। यानी ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता जो चौबीसों घंटे काम करती है बिना थक जाएँ। बिना किसी छुट्टी के
Patil Effect यही है। कम खर्च अधिक बल। जल्दी परिणाम।
बेंगलुरु से अमेरिका की यात्रा
साथ ही राहुल पाटिल की कहानी अलग है। वे बेंगलुरु की PES विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में डिग्री ली। फिर वे अमेरिका चले गए। वहाँ से मास्टर डिग्री और एमबीए की पढ़ाई की।
उनका काम Microsoft, Amazon Web Services, Oracle और Stripe में था।
अब वर्षों का अनुभव काम आया है। वे अंतरराष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिजीवियों के क्षेत्र में बड़े नाम बन गए हैं।
भारत में इसका क्या अर्थ है?
एक पक्ष भय है। दूसरी ओर, अवसर भी है।
Anthropic अब एक बड़ा ऑफिस बेंगलुरु में खोलने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य भारतीय प्रतिभा को एकजुट करना है। राष्ट्रीय AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना है
हो सकता है कि कुछ पारंपरिक आईटी क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है। लेकिन नए काम भी आएंगे। AI, डेटा साइंस, ऑटोमेशन और खोज जैसे क्षेत्रों में विकास होगा।
लोग जो खुद को सुधारेंगे, आगे रहेंगे। वह लोग जो नहीं बदलेंगे, पीछे छूट सकते हैं।
नई शुरुआत या बाजार के डर
व्यापार अक्सर तेजी से प्रतिक्रिया देता है। कभी-कभी भयभीत कभी-कभी उम्मीद से इस बार भय अधिक था।
लेकिन इतिहास से पता चलता है कि हर नई तकनीक बदलाव लाती है। जब कंप्यूटर आया तो लोग डर गए। फिर इंटरनेट मिलने पर भी भय था। आज आईटी है।
यह सच है कि कृत्रिम बुद्धि का काम करने का तरीका बदल जाएगा। वास्तव में, हर बदलाव कुछ पुरानी बातें छोड़ देता है।
लेकिन यह भी सच है कि नए अवसर हमेशा आते हैं।
आगे की दिशा
कंपनियों को अपना दृष्टिकोण बदलना होगा। उन्हें कृत्रिम बुद्धि को दुश्मन नहीं, बल्कि साथी बनाना होगा। कर्मचारियों को नई कौशल प्राप्त करनी होगी। सरकारों को नई नीतियों का निर्माण करना होगा।
‘Patil Effect’ में एकमात्र व्यक्ति नहीं है। यह दुनिया की ओर बढ़ने का संकेत है।
AI समाप्त होने वाला नहीं है। धीरे-धीरे बाजार भी संभल जाएगा। लेकिन एक बात निश्चित है। तकनीक की दुनिया निरंतर बदल रही है। और इस बदलाव में भारत सबसे आगे है।
यह सिर्फ शुरूआत है। कथा अभी भी जारी है।