RAW और IB के बाद भारत की एक और सीक्रेट एजेंसी COIN, जो चुपचाप देश की अर्थव्यवस्था की रखवाली करती है
भारत की सुरक्षा की बात आते ही RAW और IB के नाम सबसे पहले आते हैं। फिल्मों और वेब सीरीज ने इन एजेंसियों को रहस्यमय और रोमांचक बना दिया है। हाल ही में एक वेब सीरीज ने एक और गुप्त एजेंसी का ध्यान खींचा है। इस श्रृंखला का नाम तस्करी है, जिसमें भारत की एक विशिष्ट खुफिया संस्था विदेश में रहकर देश के लिए काम करती है।
यह कहानी फिल्मी है, लेकिन जिस एजेंसी का नाम इसमें लिया गया है, वह असली है। COIN इस संस्था का नाम है। बहुत कम लोग COIN का अर्थ, इसका जासूस कैसे किया जाता है और इसे विदेशों में तैनात किया जाता है। आज हम आसान शब्दों में इसी अनजान लेकिन महत्वपूर्ण संस्था की पूरी कहानी जानेंगे।
COIN, वेब सीरीज “तस्करी” से चर्चा में
Bollywood अभिनेता इमरान हाशमी की वेब सीरीज तस्करी में एक ऐसी एजेंसी को दिखाया गया है जो बहुत बड़ा असर डालती है, हालांकि वह दिखती नहीं है। इस सीरीज में दिखाया गया है कि भारत की वित्तीय खुफिया एजेंसी के एजेंट विदेशों में रहते हैं और तस्करी और पैसों की हेराफेरी से जुड़ी जानकारी भारत को भेजते हैं। देश भर में इस जानकारी पर बहुत काम होता है। COIN नाम की एजेंसी और उसका काम वास्तविक हैं, भले ही कहानी थोड़ा मसालेदार हो।
COIN और इसका पूरा नाम क्या है?
COIN का पूरा नाम है Systems Overscale Intelligence Network। भारत में यह कोई सामान्य संस्था नहीं है। यह डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, यानी डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस की एक अलग शाखा है। यह भारत से बाहर रहकर वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और तस्करी पर नजर रखना है। आसान शब्दों में, COIN देश की आय और अर्थव्यवस्था का हिस्सा है।
COIN की आवश्यकता क्यों है?
आजकल अपराध सिर्फ एक देश तक नहीं सीमित हैं। तस्करी, काला धन और टैक्स चोरी कई देशों से जुड़े हैं। यहाँ की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है अगर कोई गलत काम भारत में हो रहा है और उसकी जड़ें विदेश में हैं। COIN की भूमिका यहीं से शुरू होती है। COIN के अधिकारी सुरक्षित रूप से विदेशों में रहते हुए जानकारी जुटाते हैं और फिर उसे भारत में भेजते हैं। DRI देश भर में इस जानकारी पर काम करता है।
COIN के एजेंटों का काम कैसे होता है?
COIN के एजेंट सार्वजनिक जासूस नहीं हैं। वे अपना काम बहुत शांत तरीके से करते हैं। विदेशों में ये अधिकारी भारतीय दूतावास के साथ काम करते हैं। वही उनका कार्यालय है। वे वहीं रहते हैं और तस्करी, संदिग्ध व्यापार और पैसों की हेराफेरी की जांच करते हैं। भारत में डीआरआई को पुख्ता जानकारी देते हैं। इसके बाद, जरूरत पड़ने पर भारत में जांच शुरू होती है और बड़ी कार्रवाई भी होती है।
COIN के इनपुट भारत में DRI के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
COIN की जानकारी DRI की कई महत्वपूर्ण क्रियाओं को प्रेरित करती है। क्योंकि भारत में रहकर देश के बाहर हो रही घटनाओं की सीधी जानकारी प्राप्त करना मुश्किल है COIN एजेंट इसी कमी को दूर करते हैं। DRI अपने इनपुट से तस्करी के बड़े नेटवर्क को पकड़ सकता है। इसी कारण करोड़ों रुपये की स्मगलिंग कई बार रोकी गई है।
COVID-19 के दौरान भी COIN सक्रिय था
तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध कोविड-19 महामारी के दौरान भी नहीं बंद हुए थे। COIN के अधिकारियों ने ऐसे कठिन समय में भी अपना काम किया। DRI ने बहुत से नेटवर्क पकड़ लिए जो महामारी का फायदा उठाकर गलत काम कर रहे थे। यह बताता है कि COIN एक सक्रिय टीम है, न कि सिर्फ एक नाम की गुप्त संस्था है।
COIN एजेंटों की स्थापना चीन में
2019 में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया था। COIN के दो एजेंट चीन की राजधानी बीजिंग में भारतीय दूतावास में नियुक्त किए गए। उन्हें भारत और चीन के बीच होने वाले व्यापार का निरीक्षण करना था। चीन से भारत आने वाले सामान में सीमा शुल्क धोखाधड़ी की आशंका है। यही कारण है कि COIN एजेंटों की मौजूदगी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई। व्यापार आधारित मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन के मामले पर उनकी विशेष नजर थी।
COIN एजेंटों की आवश्यकता क्यों है?
आज व्यापार बहुत बड़ा हो गया है और बहुत तेज हो गया है। एक देश से दूसरे देश में धन और सामान सेकंडों में पहुंच जाता है। इसलिए अपराध भी जल्दी फैलते हैं। भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए विदेशों में भी देखना होगा। COIN ऐसा ही करता है। यह संस्था भारत और विदेशी संस्थाओं के बीच एक विश्वसनीय सहयोगी बन गई है।
COIN एजेंट बनने का तरीका
COIN का एजेंट बनना बहुत मुश्किल है। इसमें आम अफसरों की नियुक्ति नहीं होती। विभिन्न चरणों में जांच और चयन होता है। DRI, नारकोटिक्स अकादमी, सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और जीएसटी खुफिया के वरिष्ठ अधिकारी पहले उम्मीदवारों की सेवा का मूल्यांकन करते हैं। अधिकारी की ईमानदारी, अनुभव और जिम्मेदारी दिखाई देती है।
सख्त मंजूरी प्रक्रिया और कड़े इंटरव्यू
बाद में उम्मीदवारों को एक वरिष्ठ समिति से इंटरव्यू लिया जाता है। इस समिति में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (DRI) के महानिदेशक, सदस्य और अध्यक्ष शामिल हैं। इंटरव्यू के बाद तीन अधिकारियों का पैनल बनाया जाता है। वित्त मंत्री को यह पैनल भेजा जाता है। वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद यह विदेश मंत्रालय भेजा जाता है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट नियुक्ति समिति आखिर में अंतिम अनुमोदन देती है। तभी किसी अधिकारी को विदेश में COIN एजेंट का पद मिलता है।
सीक्रेट होते हुए भी महत्वपूर्ण कार्य
COIN के एजेंट बहुत कम चर्चा में हैं, लेकिन देश के लिए उनका महत्वपूर्ण प्रभाव है। वे भारत के हितों को बिना नाम के बचाते हैं। उनकी वजह से व्यापार के कई मार्ग बंद हो गए हैं। काले धन पर प्रतिबंध लगाया जाता है। देश की अर्थव्यवस्था बलवान है।
फिल्मी कहानियों की तुलना में अधिक वास्तविक दुनिया
वेब सीरीज तस्करी ने COIN को जनता के सामने लाया है। किसी भी कहानी की तुलना में असली सिक्के का महत्व बहुत अधिक है। यह एजेंसी नहीं दिखती, लेकिन वह हर जगह है जहां भारत का पैसा और व्यापार खतरा है।
उत्कर्ष
COIN, RAW और IB की तरह, भारत की रक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण है। COIN जासूसी और बंदूक नहीं, बल्कि आंकड़ों, सूचनाओं और समझ से लड़ता है। लेकिन इसके एजेंट चुपचाप काम करते हैं, उनका प्रभाव बहुत गहरा है। COIN जैसी एजेंसियों की आवश्यकता आने वाले समय में बढ़ेगी जब दुनिया और अधिक जुड़ी होगी। हम सभी को भारत की आर्थिक सुरक्षा में इस अनदेखे पक्ष को जानना और समझना चाहिए।