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अगर ग्रीनलैंड की बर्फ पिघली तो डूब जाएगी दुनिया? ट्रंप की जिद, जंग का खतरा और मानवता पर मंडराता संकट

राजनीतिक निर्णय कभी-कभी पूरी मानवता का भविष्य बदल सकता है। ग्रीनलैंड की हाल की बहस भी ऐसी है। जमीन का सौदा ही नहीं है। यह सवाल इंसान, बर्फ और समुद्र से जुड़ा है। ग्रीनलैंड में सैन्य संघर्ष हुआ और वहां की बर्फ तेजी से पिघल गई, तो इसका असर सभी देशों पर होगा। एक भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं रहेगा।

ग्रीनलैंड की बर्फ ने हजारों वर्षों से धरती को संतुलित रखा है। वैज्ञानिक चेतावनी है कि अगर यह बर्फ पूरी तरह पिघल जाएगी, तो समुद्र का स्तर बहुत ऊपर चला जाएगा। तब द्वीप, शहर और सभ्यताएं पानी में समा सकते हैं। यही कारण है कि आज ग्रीनलैंड सिर्फ एक द्वीप नहीं रह गया है, बल्कि दुनिया के लिए एक चेतावनी बन गया है।

ग्रीनलैंड इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है ग्रीनलैंड। यह अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच है। यहां बर्फ की घनी चादर है। धरती के इतिहास की कई कहानियां इस बर्फ में छिपी हैं। आज भी, इस बर्फ की वजह से समुद्र का स्तर नियंत्रित है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कई बार ग्रीनलैंड खरीदने की बात कही है। उनका कहना था कि यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सौदा हो सकता है। डेनमार्क, जो ग्रीनलैंड के अधीन है, ने इसे स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया। यही तनाव की कहानी है।

युद्ध हुआ तो क्या होगा?

कल्पना कीजिए कि परिस्थितियां बिगड़ती हैं और ग्रीनलैंड में सैन्य कार्रवाई होती है। वर्तमान हथियारों का धमाका और गर्मी बर्फ पर गिरता है। इससे बर्फ जल्दी पिघलती है। विस्फोटों से बर्फ पर कालिख जम जाती है। यह अधिक सूरज की रोशनी सोखता है। इससे पिघलने की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पूरी बर्फ ग्रीनलैंड में पिघलने पर समुद्र का स्तर लगभग 24 फीट तक बढ़ सकता है। सैकड़ों वर्षों में यह बदलाव होना था। इसके बावजूद, युद्ध इसे कुछ दशकों में साकार कर सकता है।

पहले कौन-से देश डूब जाएगा?

छोटे द्वीपीय देश समुद्र का पानी बढ़ते ही सबसे पहले प्रभावित होंगे। Maldives पहले आता है। समुद्र से इसकी औसत ऊंचाई बहुत कम है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सदी के अंत तक बहुत से भाग पानी में जाएगा।

Tuvalu भी डूब रहे हैं। यहाँ की जनता अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए एक डिजिटल देश बनाने की योजना बना रही है। Kiribati, Marshall Islands और Solomon Islands भी समुद्र में शामिल हो सकते हैं। इन देशों की जमीन ऊंची नहीं है। भी भागने की जगह नहीं है।

बड़े देशों को भी खतरा होगा

यह संकट छोटे देशों तक नहीं रहेगा। नीदरलैंड्स का अधिकांश हिस्सा पहले से ही समुद्र तल से नीचे है। वहां बने बांध पानी को सिर्फ एक सीमा तक रोक सकते हैं। 24 फीट पानी का दबाव किसी भी सुरक्षा दीवार को बहुत मुश्किल बना देगा।

Vietnam मेकांग डेल्टा क्षेत्र डूब सकता है। यह क्षेत्र देश की खेती का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह बंगलादेश के लिए घातक होगा। तटीय क्षेत्रों का डूबना करोड़ों लोगों को बेघर कर देगा। विश्व भर में जलवायु शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ जाएगी।

भारत पर क्या प्रभाव होगा?

भारत के लिए यह चित्र बहुत भयानक है। देश की समुद्री सीमा विस्तृत है। मुंबई जैसे शहर समुद्र के बहुत करीब हैं। निचले इलाके पहले डूबेंगे जब समुद्र का स्तर बढ़ेगा। India Gateway और आसपास की जगह पानी में घिर सकती है।

Kolkata भी बदतर है। Sundarbans पहले से ही धीरे-धीरे समुद्र में प्रवेश कर रहे हैं। Chennai और Kochi जैसे शहर समुद्री जल से खारे हो जाएंगे। इससे पीने का पानी एक बड़ी समस्या बन जाएगा।

दुनिया के सबसे बड़े शहर भी मर जाएंगे।

विकसित देश भी सुरक्षित नहीं रहेंगे अगर समुद्र का स्तर तेजी से बढ़ेगा। New York City में बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। लंदन को बचाने के लिए टेम्स बैरियर काफी काम करता है।

Jakarta पहले से ही जल रहा है। वहां की सरकार ने अपनी राजधानी बदलने का निर्णय लिया है। Bangkok और Shanghai भी इस जोखिम में हैं।

ग्लेशियर टूटने पर विनाशकारी लहर आएगी।

ग्रीनलैंड में बहुत से ग्लेशियर समुद्र किनारे हैं। जब भारी बमबारी होती है, तो जमीन में तेज कंपन होता है। ग्लेशियर इससे टूट सकते हैं। विशाल बर्फ का पहाड़ समुद्र में गिरने पर सुनामी की तरह की लहर उठेगी। यह लहर यूके और कैनेडा के तटों को बर्बाद कर सकती है।

बर्फ के अचानक टूटने से समुद्री धाराओं में भी परिवर्तन हो सकता है। गल्फ स्ट्रीम की धाराएं कमजोर होने पर यूरोप में भारी ठंड और अमेरिका में भारी गर्मी हो सकती है।

स्थानीय लोगों का भविष्य

ग्रीनलैंड में लगभग ५६०० लोग रहते हैं। इनमें से अधिकांश समुदाय से हैं। यह जमीन उनके लिए एक पहचान है और सिर्फ रहने की जगह नहीं है। युद्ध की स्थिति में वहां की मुख्य संरचना ध्वस्त हो जाएगी। हवाई पट्टियां, घर और सड़कें सब बेकार हो जाएंगे।

ग्रीनलैंड में परमाफ्रॉस्ट है। सैन्य वाहनों से जमीन धंसने लगेगी। परमाफ्रॉस्ट पिघलने से मीथेन गैस निकल जाएगी। यह गैस जल्दी गर्म करती है। इससे दुनिया भर में मौसम और खराब हो सकता है।

एक युद्ध जो विश्व को बदल देगा

ग्रीनलैंड पर किसी भी सैन्य अभियान का प्रभाव सीमित नहीं रहेगा। यह संकट सीमाओं को नहीं मानेगा। बर्फ गिर जाएगी। समुद्र पार होगा। शहर डूब जाएगा। लोग घर नहीं होंगे।

हथियारों की जंग नहीं होगी। इंसानों और प्रकृति के बीच युद्ध होगा। और इस संघर्ष में इंसान की हार ही निर्णायक है। अब दुनिया को निर्णय लेना होगा। वरना ग्रीनलैंड की बर्फ पिघल जाएगी, साथ ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का भी भविष्य।

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