ट्रंप की ग्रीनलैंड पर धमकी: नाटो टूटेगा या आर्टिकल 5 बचा लेगा?
डोनाल्ड ट्रंप फिर से जोर दे रहे हैं। वे ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाना चाहते हैं। अगर बात न बने, तो सेना भेज देंगे। यह खबर सुना तो सब डर गए। नाटो के देश आपस में लड़ेंगे क्या? ट्रंप कहते हैं, “यह हमारा हक है।” डेनमार्क और ग्रीनलैंड वाले नाराज हैं। दुनिया देख रही है। क्या होगा आगे?
ट्रंप का दूसरा टर्म चल रहा है। वे “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” का नारा दोहरा रहे हैं। पहले वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई की। वहाँ के संसाधन ले लिए। अब ग्रीनलैंड पर नजर है। यह द्वीप बड़ा है। बर्फ से ढका हुआ। ट्रंप पहले मीठी बातें करते थे। अब धमकी दे रहे हैं। या तो बेच दो, या हम ले लेंगे।
ग्रीनलैंड कैसा देश है?
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। ज्यादातर बर्फ है वहाँ। लोग कम हैं। करीब 60,000 लोग रहते हैं। घर के काम खुद संभालते हैं। लेकिन डेनमार्क का हिस्सा है। अपनी सेना नहीं है। डेनमार्क की सेना भी छोटी है। अमेरिका से लड़ नहीं सकती।
ट्रंप लंबे समय से कह रहे हैं। डेनमार्क, ग्रीनलैंड दो给我们। डेनमार्क मना करता है। ग्रीनलैंड वाले भी नहीं चाहते। ट्रंप वादे कर रहे हैं। पैसे देंगे। मदद करेंगे। लेकिन डर है। अमेरिका आक्रामक हो गया तो क्या?
वहाँ पहले से पिटुफिक स्पेस बेस है। अमेरिका और डेनमार्क मिलकर चलाते हैं। दोनों नाटो के पुराने सदस्य हैं। नाटो मजबूत गठबंधन है। लेकिन अब टेंशन बढ़ गई।
नाटो क्या है? क्यों महत्वपूर्ण?
नाटो 1949 में बना। 32 देश हैं उसमें। सबसे ताकतवर सैन्य समूह। अमेरिका सबसे बड़ा योगदान देता है। यूरोप और कनाडा के देश भी हैं। उद्देश्य: एक-दूसरे की रक्षा। अगर कोई बाहर से हमला करे, तो सब लड़ेंगे।
ट्रंप नाटो से नाराज रहते हैं। कहते हैं, अमेरिका ज्यादा खर्च करता है। बाकी देश कम। वे कहते हैं, अपना बजट बढ़ाओ। पहले टर्म में भी धमकी दी थी। अब ग्रीनलैंड मुद्दा आया।
आर्टिकल 5: नाटो की ढाल
आर्टिकल 5 नाटो का सबसे बड़ा नियम है। अगर किसी एक देश पर हमला हो, तो सब पर हमला माना जाएगा। सब मिलकर लड़ेंगे। इतिहास में सिर्फ एक बार लगा। 2001 में। 9/11 हमला अमेरिका पर। सबने साथ दिया। लेकिन पूरा युद्ध नहीं हुआ। अमेरिका ने खुद संभाला।
अब सवाल है। यह आर्टिकल बाहरी दुश्मन के लिए है। लेकिन अगर नाटो का ही एक देश दूसरे पर हमला करे? तब क्या? अमेरिका अगर डेनमार्क पर जाए, तो बाकी देश क्या करेंगे? आर्टिकल 5 लगेगा क्या?
सभी देशों की सहमति चाहिए। अगर दो देश लड़ें, तो गठबंधन फंस जाएगा। खुद पर वोट नहीं कर सकता। यूरोप वाले अमेरिका से नाराज हैं। शायद कुछ करें।
नाटो में पहले भी झगड़े हुए
नाटो में पहले झगड़े हुए हैं। कोई बड़ा युद्ध नहीं। लेकिन टेंशन जरूर। देखिए ये उदाहरण:
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1950 के दशक में। यूके और आइसलैंड। मछली पकड़ने पर लड़ाई। 20 साल चली तनातनी।
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वियतनाम युद्ध। अमेरिका लड़ा। यूरोप वाले खुश नहीं। फ्रांस ने नाटो कमांड छोड़ दी। 43 साल बाद लौटा।
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1974 में। ग्रीस और तुर्की। साइप्रस पर झगड़ा। तुर्की ने कब्जा किया। ग्रीस नाराज। नाटो से दूर हो गया। 6 साल बाद लौटा।
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2003 में। इराक युद्ध। यूरोप के कई देश सहमत नहीं।
इनमें युद्ध टला। लेकिन ग्रीस-तुर्की वाला करीब था। नाटो ने तुर्की नहीं रोका। ग्रीस चला गया। अब ग्रीनलैंड मुद्दा बड़ा है।
यूरोप और कनाडा की प्रतिक्रिया
यूरोप के नेता बोल पड़े। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ हैं। कनाडा भी। अगर अमेरिका हमला करे, तो नाटो टूटेगा। इतिहास का सबसे बड़ा संकट। आर्टिकल 5 पर सवाल उठेंगे।
ट्रंप कहते हैं। आर्कटिक में दुश्मन रोकने के लिए चाहिए। रूस, चीन से खतरा। लेकिन डेनमार्क मना। ग्रीनलैंड वाले डर रहे। अमेरिका की ताकत सब जानते। लेकिन नाटो साथ है।
क्या होगा आगे? संभावनाएँ
कई रास्ते हैं। पहला: बातचीत से सुलझे। ट्रंप मीठी बातें करें। डेनमार्क राजी हो। लेकिन मुश्किल लगता।
दूसरा: अमेरिका हमला करे। तब नाटो फटेगा। यूरोप विरोध करेगा। आर्टिकल 5 न लगे। गठबंधन कमजोर। ट्रंप को फायदा। लेकिन दोस्त खोएगा।
तीसरा: नाटो मीटिंग बुलाए। नियम बनाए। सदस्य देशों के झगड़े रोकने के। लेकिन ट्रंप सुनेंगे क्या?
ट्रंप पहले टर्म में नाटो छोड़ने की बात की। अब फिर। ग्रीनलैंड हर हाल में चाहिए। डर है। दुनिया बदल रही। नाटो की परीक्षा है।
यूरोप अमेरिका से तंग। डिफेंस बजट बढ़ा रहे। लेकिन ग्रीनलैंड पर क्या? देखते हैं। ट्रंप की धमकी ने हलचल मचा दी। नाटो बचेगा या टूटेगा? समय बताएगा।