“जैसा अन्न, वैसा मन”: सिद्ध चिकित्सा बताए सत्व, रजस और तमस भोजन का रहस्य
क्या आपने कभी सोचा है कि आपका भोजन आपके मन और शरीर दोनों पर प्रभाव डालता है? पुरानी कहावत, “जैसा अन्न, वैसा मन”, सच नहीं है। इसे दक्षिण भारत की प्राचीन सिद्ध चिकित्सा प्रणाली भी मानती है। इस उपचार पद्धति के अनुसार, हमारा भोजन हमारे तीन गुणों को सीधे प्रभावित करता है: सत्व (शुद्ध और शांत), रजस (सक्रिय और तीव्र) और तमस (सुस्त और निष्क्रिय)।
केंद्रीय आयुष मंत्रालय ने भी कहा कि स्वस्थ भोजन से मन शांत, शरीर स्वस्थ और जीवन संतुलित रह सकता है। हम इस लेख में आपके स्वभाव और जीवनशैली के लिए कौन-सा भोजन सबसे अच्छा है और क्यों बताएंगे।
क्या सिद्ध चिकित्सा है?
दक्षिण भारत में सिद्ध चिकित्सा की परंपरा बहुत पुरानी है। यह सिर्फ बीमारी को ठीक करने पर नहीं बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर भी फोकस करता है। यह मानता है कि सत्व, रजस और तमस हर व्यक्ति में होते हैं। इन गुणों को हमारा भोजन बढ़ाता या कम करता है।
ज्ञात चिकित्सकों का कहना है कि अगर आप अपने स्वभाव और गुणों के अनुसार भोजन करें, तो बीमारियां दूर रहेंगी और आप मानसिक रूप से शांति महसूस करेंगे।
1. सत्व—संतुलन और शुद्धता का प्रतीक
सत्व का अर्थ है उजास, शांति और शुद्धता। स्थिर, शांत और संतुलित व्यक्ति सत्व प्रधान है। उसका मन साफ है और बहुत गुस्सा नहीं आता।
सात्त्विक भोजन क्या शामिल करता है?
इस खाने को सिद्ध चिकित्सा में सत्तुवम कहा जाता है। इसमें हल्के, प्राकृतिक और ताजे खाद्य पदार्थ शामिल हैं—
- ताजे फल और मौसमी सब्जियां
- साबुत अनाज जैसे गेहूं, जौ, बाजरा, ओट्स
- दूध और दूध से बने हल्के उत्पाद
- मूंग दाल, चना दाल
- हल्के मसाले जैसे हल्दी, जीरा, धनिया
ये खाद्य पदार्थ शरीर को ऊर्जा देते हैं लेकिन मन को नहीं भरते।
सात्त्विक भोजन के लाभ
- मन को शांत और शुद्ध बनाता है।
- ध्यान और एकाग्रता शक्ति देते हैं।
- रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
- शरीर को हल्का करता है और उसे ताज़ा करता है।
- अच्छी नींद आती है और तनाव कम होता है।
क्या सबसे अच्छा है?
सात्त्विक भोजन ध्यान, योग या मानसिक काम करने वालों के लिए सर्वोत्तम है। लोग आत्मविकास और मानसिक स्थिरता प्राप्त करते हैं।
2. रजस: सक्रियता और ऊर्जा का प्रतीक
रजस का अर्थ है सक्रियता, उत्साह और जोश। रजस प्रधान लोग मेहनती, ऊर्जावान और तेज होते हैं, लेकिन उन्हें कभी-कभी बहुत जल्दी क्रोध आ सकता है।
राजसी भोजन में क्या शामिल होता है?
चिकित्सा जगत में इसे इराकतम कहा जाता है। इसमें शरीर को उत्तेजित करने वाले भोजन शामिल हैं—
- मसालेदार और तीखा खाना
- नमकीन व खट्टा भोजन
- प्याज, लहसुन, मिर्च
- चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक
- तली-भुनी चीजें या फास्ट-फूड
ये चीजें शरीर को तुरंत ऊर्जा देती हैं, लेकिन अधिक खाने से मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है।
राजसिक खाना खाने के लाभ और नुकसान
फाइदा:
- शरीर को तत्काल ऊर्जा मिलती है।
- काम की गति को बढ़ाता है।
- ठंडे मौसम में काम करना अच्छा है।
दुर्भाग्य:
- ज्यादा खाने से आप क्रोधित, भयभीत या बेचैन हो सकते हैं।
- मानसिक तनाव और कम नींद हो सकता है।
- लंबे समय में पाचन में परेशानियां हो सकती हैं।
“रजसिक भोजन शरीर को जाग्रत रखता है, पर मन को थका देता है,” एक प्रसिद्ध चिकित्सा के विशेषज्ञ ने कहा।”
इसलिए संतुलित मात्रा में इसे खाना चाहिए।
3. तमस: असंतुलन और सुस्ती का प्रतीक
तमस का अर्थ है अन्धकार, थकान और जड़ता। तमस प्रधान लोग अक्सर थके हुए, उदास या अनिच्छुक लगते हैं।
तामसिक भोजन क्या है?
तमकम, सिद्ध चिकित्सा में इसका नाम है। इसमें शामिल हैं—
- बासी और बचा हुआ खाना
- बहुत तला या प्रोसेस्ड भोजन
- मांसाहार और जंक फूड
- शराब व नशे की चीजें
ऐसा भोजन शरीर को भारी करता है और मन को थक जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर की क्षमता घटाता है।
तामसिक भोजन से नुकसान
- नींद, थकान और थकान को बढ़ाता है।
- नकारात्मक सोच पैदा करता है।
- थकान और पेट की बीमारियां होती हैं।
- स्मरण और ध्यान की शक्ति कम होती है।
चिकित्सा के अनुसार, इस तरह का भोजन सिर्फ जरूरत होने पर ही लें, वरना टालना बेहतर है।
योग्य भोजन से शरीर और मन का संतुलन
रजस या तमस को सिद्ध चिकित्सा में पूरी तरह गलत नहीं बताया गया है। संतुलन सबसे ज़रूरी है।
शरीर को कभी-कभी रजसिक भोजन की ऊर्जा चाहिए, तो कभी-कभी सात्त्विक भोजन की शांति चाहिए। लेकिन शरीर में असंतुलन धीरे-धीरे पैदा होता है अगर कोई व्यक्ति लगातार तामसिक भोजन खाता है।
संतुलित आहार के लिए कुछ सरल टिप्स:
- सुबह और रात को हल्का भोजन करें।
- अगर आप बहुत काम करते हैं, तो दिन में थोड़ा खाना खा सकते हैं।
- सप्ताह में एक या दो बार तमसिक भोजन लें।
- ताजे फल-सब्जियां और अधिक पानी पिएं।
आयुष मंत्रालय द्वारा दी गई सलाह
केंद्रीय आयुष मंत्रालय का कहना है कि सही आहार लेने से रोग नहीं रुकते, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ती है।
सात्त्विक आहार लेने से शरीर हल्का होता है और मन सकारात्मक रहता है। वहीं रजसिक आहार केवल कुछ ही मात्रा में शरीर को चुस्त रखता है। तमसिक भोजन से दूर रहना चाहिए, खासकर प्रोसेस्ड खाना।
आधुनिक सिद्ध चिकित्सा
यह सिद्ध चिकित्सा का विचार आज और भी महत्वपूर्ण लगता है, क्योंकि आज लोग तनाव, चिंता और नींद की कमी से जूझ रहे हैं।
सत्व प्रधान आहार खाने से न केवल आपका शरीर मजबूत होता है, बल्कि आपको शांति और भावनात्मक संतुलन मिलता है। “भोजन ही सबसे पहली दवा है,” कई योग गुरुओं और आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है।”
उत्कर्ष
हमारा भोजन हमारी आत्मा का आईना है। ताजे, शुद्ध और संतुलित भोजन से हमारा मन भी समान रहेगा। चिकित्सा सिद्धान्तों का ज्ञान आज भी उतनी ही सटीक है जितनी सदियों पहले था।
“जैसा भोजन वैसा मन”— यह सिर्फ एक कहावत नहीं है; यह एक स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र है।
तमसिक भोजन से बचें और सात्त्विक भोजन अपनाएं।
वास्तविक शांति और शरीर की ऊर्जा इसमें हैं।